चुनाव आयोग के मुद्दे पर TMC-वामदल एकजुट, ममता और एमए बेबी ने उठाई आवाज

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कभी एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे तृणमूल कांग्रेस और वामदल अब करीब आते नजर आ रहे हैं। राज्य की सत्ता से बाहर होने के बाद वामदलों और टीएमसी के बीच राजनीतिक दूरियां कम होने लगी हैं। चुनाव आयोग से जुड़े घटनाक्रम को लेकर तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी और माकपा महासचिव एम बेबी के बीच टेलीफोन पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई है।

ममता बनर्जी और माकपा महासचिव की फोन पर बातचीत

हाल ही में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी सिलसिले में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और सीपीएम महासचिव एम बेबी के बीच फोन पर संवाद हुआ है। दोनों नेताओं के बीच देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर विस्तार से चर्चा हुई। विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के ये दोनों प्रमुख दल अब तक आपसी संबंधों को लेकर असहज रहे हैं, लेकिन मौजूदा हालात ने इन्हें एक मंच पर आने के लिए प्रेरित किया है।

विपक्षी गठबंधन की बैठक बुलाने की जोरदार मांग

माकपा महासचिव द्वारा विपक्षी दलों के नेताओं को पत्र लिखकर बैठक बुलाने का आग्रह किया गया था। इस पहल का समर्थन करते हुए ममता बनर्जी ने सीपीएम नेता से फोन पर बात की और अगले कुछ दिनों के भीतर इंडिया अलायंस की आपात बैठक आयोजित करने का आह्वान किया। ममता ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से भी दूरभाष पर संपर्क साधा है। विपक्षी दलों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में सभी दलों को एकजुट होकर लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता के लिए संयुक्त रणनीति बनानी चाहिए।

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

माकपा महासचिव ने विपक्षी दलों को भेजे अपने पत्र में चुनाव आयोग के हालिया फैसलों और कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए थे। पत्र में कहा गया है कि आयोग के फैसलों से देश के करोड़ों मतदाताओं के मताधिकार पर संकट मंडरा रहा है। विपक्षी दलों की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाना, चुनाव आयोग के कामकाज की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराना और विवादित प्रक्रियाओं पर रोक लगाना शामिल है। इन सभी मुद्दों पर संसद से लेकर सड़क तक विरोध प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है।

टीएमसी के सामने राजनीतिक और आंतरिक चुनौतियां

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए यह दौर काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। विधानसभा चुनावों में पराajय के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और आंतरिक कलह की खबरें सामने आती रही हैं। इसके अलावा, चुनाव आयोग के हालिया निर्णयों ने तृणमूल कांग्रेस की संगठनात्मक मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। ऐसे में वामदलों के साथ संभावित राजनीतिक नजदीकियां ममता बनर्जी के लिए नई रणनीति का हिस्सा हो सकती हैं।

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