नई दिल्ली। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के उपरांत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची से भारी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने का एक गंभीर मामला सामने आया है। इसका प्रत्यक्ष प्रभाव चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र के बूथ क्रमांक-38 में देखने को मिला है। इस बूथ के अंतर्गत आने वाले शिव मंदिर बागीची तेजपाल, दरियागंज और जेजे बेला एस्टेट (विजय घाट) क्षेत्रों में वर्ष 2025 की मतदाता सूची में पंजीकृत 729 मतदाताओं में से केवल एक मतदाता का नाम ही नई मसौदा सूची में शेष बचा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, क्षेत्र के शेष 728 नागरिकों के नाम मतदाता सूची से गायब हैं।
वर्षों से निवास कर रहे नागरिकों के नाम सूची से गायब
इस क्षेत्र में स्थित स्थानीय मंदिर के महंत कंचन गिरि का नाम ही मसौदा सूची में शामिल है, जबकि प्रभावित स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे दशकों से इन्हीं क्षेत्रों में निवास कर रहे हैं और प्रत्येक निर्वाचन में अपने मताधिकार का प्रयोग करते आए हैं। इसके बावजूद, प्रशासनिक रिकॉर्ड में कई जीवित एवं स्थाई नागरिकों को 'मृत' अथवा 'अन्यत्र स्थानांतरित' प्रदर्शित कर दिया गया है। अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित होने के पश्चात अब नागरिक पुनः फार्म-6 भरकर मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए प्रयासरत हैं।
विस्थापित परिवारों और बुजुर्ग मतदाताओं के समक्ष संकट
स्थानीय नागरिकों ने अपना दुख व्यक्त करते हुए बताया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों के पश्चात उन्हें अपनी भू-संपत्ति और रोजगार से हाथ धोना पड़ा था, और अब मतदाता सूची से नाम हटने से उनके सामने पहचान का संकट खड़ा हो गया है। 80 वर्षीय रामचरण और 75 वर्षीय दुलारी जैसे वयोवृद्ध नागरिकों ने बताया कि उनकी कई पीढ़ियां यहां निवास कर रही हैं और वे स्वतंत्र भारत के शुरुआती दौर से मतदान करते आ रहे हैं। एसआईआर सत्यापन के पश्चात भी सूची में नाम न होना उनके नागरिक और राजनीतिक अस्तित्व पर सवाल खड़े कर रहा है।
47 लाख से अधिक नाम बाहर, दावों की संख्या बेहद कम
विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में दिल्ली के लगभग 47.6 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सम्मिलित नहीं किए गए हैं। इसके विपरीत, नाम पुनः जुड़वाने के लिए प्राप्त आवेदनों की संख्या अत्यंत सीमित है। 30 अगस्त को ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद से 24 दिनों के भीतर केवल एक लाख नागरिकों ने फार्म-6 के माध्यम से दावे प्रस्तुत किए हैं, जबकि आवेदन की अंतिम समय-सीमा में अब मात्र छह दिन शेष हैं।
उल्लेखनीय है कि जून माह की मतदाता सूची में दिल्ली में करीब 1.45 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे, जो एसआईआर ड्राफ्ट में घटकर लगभग 97.5 लाख रह गए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, वंचित पात्र नागरिक आवश्यक दस्तावेजों के साथ 30 सितंबर तक आवेदन कर सकते हैं। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 4 नवंबर को निर्धारित है।
विपक्षी दलों का विरोध और राजनीतिक सरगर्मी
मतदाता सूची से भारी पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने इस संपूर्ण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने इसे एक पारदर्शी प्रशासनिक प्रक्रिया करार देते हुए कहा है कि केवल फर्जी व अपात्र प्रविष्टियों को हटाया गया है और सभी पात्र नागरिकों को दावा प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जा रहा है। इसके साथ ही कई अन्य राजनीतिक दल और युवा संगठन भी इस निर्णय के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।
एसआईआर रद्द कर पुरानी सूची बहाल करने की मांग
आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रद्द कर तीन वर्ष पुरानी मतदाता सूची को पुनः बहाल करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे और हाल में संपन्न हुए विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों को पुनः कराने की मांग को लेकर भी विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी इस विषय पर विरोध मार्च निकालकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

