नई दिल्ली। भारतीय शहर वैश्विक धरातल पर सबसे मजबूत आर्थिक एवं शहरी विकास केंद्रों के रूप में तेजी से उभर रहे हैं। 'ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स' द्वारा जारी वर्ष 2026 की 'ग्लोबल सिटीज इंडेक्स' रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2050 तक देश की राजधानी दिल्ली दुनिया की 14वीं सबसे बड़ी शहरी अर्थव्यवस्था बन जाएगी, जिसकी आर्थिक क्षमता ₹191.55 लाख करोड़ ($2 खरब) से अधिक होने का अनुमान है।
अगले 24 वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था के नए इंजन के रूप में उभरने वाले विश्व के शीर्ष-100 शहरों में भारत के 55 तथा शीर्ष-50 में 23 शहरों ने अपना स्थान बनाया है। इसमें कई द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी के छोटे शहर भी शामिल हैं। हालांकि, पांच प्रमुख मापदंडों पर आधारित समग्र वैश्विक सूचकांक के 1,000 शहरों में कोई भी भारतीय शहर शीर्ष-250 में जगह नहीं बना सका है।
महानगर एवं उभरते आर्थिक केंद्र
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े महानगर जनसंख्या वृद्धि एवं आर्थिक गतिविधि के मुख्य केंद्र बने रहेंगे। अध्ययन में दिल्ली, चेन्नई, मुंबई, बंगलूरू, हैदराबाद और कोलकाता को विकासशील महानगरों की श्रेणी में रखा गया है। वहीं आगरा, अहमदाबाद, जयपुर, कोयंबटूर, पुणे, सूरत, वडोदरा तथा नागपुर को उभरते आर्थिक केंद्रों के रूप में चिह्नित किया गया है।
समग्र वैश्विक रैंकिंग में प्रमुख भारतीय शहरों की स्थिति
| क्रम | शहर | समग्र वैश्विक रैंकिंग |
| 1 | दिल्ली | 268वां स्थान |
| 2 | बंगलूरू | 311वां स्थान |
| 3 | मुंबई | 330वां स्थान |
| 4 | चेन्नई | 381वां स्थान |
| 5 | हैदराबाद | 421वां स्थान |
| 6 | पुणे | 427वां स्थान |
| 7 | त्रिशूर | 477वां स्थान |
नोट: सूचकांक का मूल्यांकन अर्थव्यवस्था (30%), मानव पूंजी (25%), जीवन की गुणवत्ता (25%), पर्यावरण (10%) तथा गवर्नेंस (10%) के आधार पर किया गया है।
उत्तर प्रदेश के सर्वाधिक 15 शहर शामिल, लखनऊ राज्य में शीर्ष पर
वैश्विक सूचकांक में उत्तर प्रदेश के सबसे अधिक 15 शहरों को स्थान प्राप्त हुआ है, हालांकि इनमें से कोई भी शहर शीर्ष-700 में जगह नहीं बना पाया। राज्य में सर्वोच्च स्थान लखनऊ (725वां) को मिला, जिसने मानव पूंजी क्षेत्र में 493वां स्कोर अर्जित किया। उत्तर प्रदेश के सभी शहरों का गवर्नेंस स्कोर 415 दर्ज हुआ।
उत्तर प्रदेश के शहरों की स्थिति:
लखनऊ: 725वां स्थान
मुरादाबाद: 745वां स्थान
प्रयागराज: 764वां स्थान
बरेली: 784वां स्थान
अलीगढ़: 804वां स्थान
गोरखपुर: 821वां स्थान
मेरठ: 827वां स्थान
वाराणसी: 832वां स्थान (पर्यावरण रैंकिंग 952, जो भारतीय शहरों में सबसे कमजोर है)
आगरा: 861वां स्थान
सहारनपुर: 872वां स्थान
फैजाबाद: 891वां स्थान
कानपुर: 899वां स्थान
हरदोई: 908वां स्थान
शाहजहांपुर: 953वां स्थान
सुल्तानपुर: 999वां स्थान
पंजाब एवं चंडीगढ़ का प्रदर्शन
केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ ने समग्र सूचकांक में 558वीं रैंक हासिल की। इसने अर्थव्यवस्था में 307 तथा मानव पूंजी में 474वां स्कोर प्राप्त किया। वहीं पंजाब राज्य के तीन शहरों को स्थान मिला:
लुधियाना: 611वां स्थान (औद्योगिक अर्थव्यवस्था में मजबूत, किंतु पर्यावरण मोर्चे पर पिछड़ा)
जालंधर: 706वां स्थान
अमृतसर: 747वां स्थान
बंगलूरू में नई एआई सिटी से बढ़ेगी क्षमता
प्रतिवेदन के अनुसार, बंगलूरू की जनसंख्या विगत 25 वर्षों में दोगुनी से अधिक हुई है और वर्ष 2000 से शहर की जीडीपी में औसतन 10 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। प्रस्तावित नई 'एआई सिटी' के विकास से बंगलूरू बीपीओ सेवाओं से आगे बढ़कर अनुसंधान एवं विकास (R&D), डीप टेक तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेवाओं का वैश्विक केंद्र बनेगा।
दिल्ली 49 पायदान की लगाएगी छलांग
अगले 24 वर्षों में दिल्ली वैश्विक रैंकिंग में 49 पायदान ऊपर चढ़कर शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगी। वर्तमान में 268वें स्थान पर मौजूद दिल्ली आने वाले दशकों में सबसे तेज जीडीपी विकास दर दर्ज करने वाले शहरों में अग्रगण्य रहेगी। 2050 तक दिल्ली और मुंबई दुनिया के सर्वाधिक आबादी वाले महानगरों में शुमार हो जाएंगे।
उत्तराखंड: देहरादून को 632वां स्थान
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को सूचकांक में 632वां स्थान मिला है। शहर ने मानव पूंजी में 479वां स्कोर हासिल किया, किंतु पर्यावरण (614) एवं जीवन की गुणवत्ता (879) के मापदंडों पर पिछड़ गया। रिपोर्ट दर्शाती है कि राज्य की आर्थिक गतिविधियां मुख्य रूप से राजधानी तक ही सीमित हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का हिस्सा होने के कारण गुरुग्राम एवं फरीदाबाद को पृथक श्रेणी में गिना गया।
पर्यावरण व जीवन की गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता
आर्थिक संवृद्धि और मानव पूंजी में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बावजूद, भारतीय शहर जीवन की गुणवत्ता, पर्यावरणीय स्थिति, बुनियादी ढांचे तथा आय विषमता जैसे पैमानों पर कम स्कोर प्राप्त करने के कारण समग्र वैश्विक रैंकिंग के शीर्ष-250 में स्थान बनाने से चूक रहे हैं।

