रूस चुनाव में पुतिन की पार्टी को मिली बंपर जीत,यूनाइटेड रशिया ने जीतीं 355 सीटें

Russia Putin Win मॉस्को : रूस में तीन दिन तक चले संसदीय चुनाव के बाद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थन वाली यूनाइटेड रशिया पार्टी ने स्टेट ड्यूमा में बड़ी जीत दर्ज की है. शुरुआती आधिकारिक नतीजों के मुताबिक पार्टी ने 450 सदस्यीय निचले सदन में 355 सीटें हासिल की हैं. यह आंकड़ा पार्टी के लिए पिछली बार के मुकाबले और भी बड़ी संसदीय शक्ति को दर्शाता है.

रूस में इस बार मतदान 18 से 20 सितंबर 2026 तक कराया गया. यह 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद ये देश में पहला संसदीय चुनाव था. चुनाव में स्टेट ड्यूमा की सभी 450 सीटों के लिए मतदान हुआ. इनमें 225 सीटें पार्टी सूची के आधार पर और 225 सीटें एकल-सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों के जरिए चुनी जाती हैं.

Russia Putin Win:57 फीसदी से ज्यादा वोट,355 सीटों पर कब्जा

रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग के अनुसार 95 फीसदी से ज्यादा मतों की गिनती के बाद यूनाइटेड रशिया को करीब 57.83 फीसदी वोट मिले। 2021 के पिछले संसदीय चुनाव में पार्टी को 49.8 फीसदी वोट मिले थे. इस लिहाज से वोट प्रतिशत में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

355 सीटों के साथ यूनाइटेड रशिया को स्टेट ड्यूमा में संवैधानिक बहुमत हासिल हो गया है. 450 सदस्यीय सदन में साधारण बहुमत के लिए 226 सीटें जरूरी होती हैं. ऐसे में 355 सीटों का आंकड़ा पार्टी को कानून बनाने की प्रक्रिया में बेहद मजबूत संसदीय स्थिति देता है.

पुतिन के लिए क्यों अहम है यह चुनाव?

यह चुनाव केवल संसद के सदस्यों के चयन तक सीमित नहीं था. रूस के राजनीतिक नेतृत्व ने इसे देश की मौजूदा नीतियों और यूक्रेन युद्ध के बीच जनता के समर्थन के संकेत के तौर पर भी पेश किया. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चुनाव को रूस की मौजूदा दिशा के लिए समर्थन के आकलन के रूप में देखा था.

यूनाइटेड रशिया लंबे समय से रूस की प्रमुख सत्तारूढ़ पार्टी रही है और संसद में उसका प्रभाव मजबूत रहा है. 2021 के चुनाव में भी पार्टी ने 450 में से दो-तिहाई से ज्यादा सीटें हासिल की थीं।.इस बार 355 सीटों के साथ उसकी संसदीय स्थिति और मजबूत हुई है.

चुनाव में विपक्ष की स्थिति पर भी उठे सवाल

हालांकि चुनाव परिणामों के साथ रूस की चुनावी प्रक्रिया को लेकर विवाद और आलोचनाएं भी सामने आई हैं. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कई सरकार-विरोधी और युद्ध-विरोधी नेताओं को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखा गया, जबकि कुछ विपक्षी नेताओं को जेल या देश छोड़ने की स्थिति का सामना करना पड़ा.

रूस की उदारवादी पार्टी याब्लोको को भी चुनाव से पहले बैलेट से हटा दिया गया था. इसके अलावा यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन (OSCE) के चुनाव पर्यवेक्षकों को रूस ने आमंत्रित नहीं किया. इन परिस्थितियों को लेकर चुनाव की प्रतिस्पर्धात्मकता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं.

दूसरी ओर, रूसी अधिकारियों ने चुनाव प्रक्रिया को वैध बताया है और मतदान के दौरान साइबर हमलों तथा यूक्रेनी ड्रोन हमलों की भी जानकारी दी. चुनाव के अंतिम दिन मॉस्को और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले की खबरें भी सामने आईं.

मतदान प्रतिशत करीब 59 फीसदी

केंद्रीय चुनाव आयोग के मुताबिक इस चुनाव में मतदान प्रतिशत करीब 59 फीसदी रहा. रिपोर्टों में कुल मतदान 59.32 फीसदी तक पहुंचने की जानकारी दी गई है.

रूस की चुनाव प्रणाली के तहत मतदाताओं ने पार्टी सूची के लिए अलग मतदान किया और एकल-सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों के उम्मीदवारों के लिए अलग वोट डाला. इसी व्यवस्था के चलते किसी पार्टी के वोट प्रतिशत और उसके कुल सीटों के आंकड़े में बड़ा अंतर हो सकता है.

355 सीटों पर कब्जा पुतिन के लिए क्या मायने रखते हैं 

355 सीटों के साथ यूनाइटेड रशिया के पास स्टेट ड्यूमा में मजबूत संवैधानिक बहुमत है। इससे राष्ट्रपति पुतिन के नेतृत्व वाली सरकार को संसद में अपनी नीतियों और विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत समर्थन मिलेगा।

हालांकि चुनाव परिणामों को रूस के घरेलू राजनीतिक माहौल के साथ-साथ यूक्रेन युद्ध, अर्थव्यवस्था और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। आने वाले समय में संसद में इस बहुमत का इस्तेमाल किन नीतिगत फैसलों के लिए किया जाता है, यह रूस की घरेलू और विदेश नीति की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा।

Latest news

Related news