10 साल बाद फिर खुलेगा पटना का गोलघर? 20 करोड़ से होगा कायाकल्प

Patna Golghar Reopen: बिहार की राजधानी पटना की पहचान और ऐतिहासिक धरोहर गोलघर को लेकर बड़ी खबर है. यहां आने वाले पर्टकों को करीब एक दशक से गोलघर पर चढ़ने की मनाही है,लेकिन अब इसे आम लोगों के लिए फिर से खोलने की तैयारी शुरू हो गई है. अगर प्रस्तावित मरम्मत और जीर्णोद्धार का काम तय समय के मुताबिक पूरा हुआ, तो लोग एक बार फिर गोलघर की सीढ़ियां चढ़कर पटना शहर का खूबसूरत नजारा देख सकेंगे.

गुरुवार (17 सितंबर 2026) को बिहार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने बताया कि गोलघर और इसकी सीढ़ियों की मरम्मत का काम भवन निर्माण विभाग की ओर से कराया जाएगा. इस परियोजना पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. मंत्री के मुताबिक निर्माण और मरम्मत का काम पूरा करने में लगभग छह महीने का समय लग सकता है.

Patna Golghar Reopen:छह महीने में बदल सकती है गोलघर की तस्वीर

मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने गोलघर को पटना की ऐतिहासिक पहचान बताते हुए कहा कि इसका स्वरूप अब बदला जाएगा. उनका कहना है कि जिस तरह पटना में बदलाव और विकास के काम हो रहे हैं,उसी तरह गोलघर को भी नए रूप में तैयार किया जाएगा.

गोलघर लंबे समय से पर्यटकों और स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा है. इसकी ऊंचाई से पटना के आसपास का बड़ा हिस्सा दिखाई देता है. ऐसे में अगर सीढ़ियों की मरम्मत पूरी होने के बाद यहां चढ़ने की अनुमति मिलती है, तो पर्यटकों के लिए यह एक बार फिर प्रमुख आकर्षण बन सकता है.

2016 में बंद हुई थी सीढ़ियां

गोलघर पर ऊपर जाने और नीचे उतरने के लिए दो अलग-अलग सीढ़ियां बनी हुई हैं. इनमें एक पूर्वी और दूसरी पश्चिमी दिशा में है . वर्ष 2016 में मरम्मत के उद्देश्य से पूर्वी तरफ की सीढ़ियों को बंद किया गया था.

इसके बाद गोलघर के संरक्षण और जीर्णोद्धार से जुड़े काम भी किए गए. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI के वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में भी इसके संरक्षण का काम हुआ. हालांकि, बाद में गोलघर पर आम लोगों के चढ़ने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई.

इस दौरान गोलघर के आसपास विकसित किए गए पार्क में लोगों का आना-जाना जारी रहा. पर्यटक गोलघर को बाहर से देख सकते थे, लेकिन उसके ऊपर चढ़कर पटना का विहंगम दृश्य देखने की अनुमति नहीं थी.

गोलघर के आसपास बना है पार्क

गोलघर को बंद किए जाने के बाद इसके आसपास के इलाके को भी विकसित किया गया.यहां पार्क बनाया गया,जहां स्थानीय लोग और पर्यटक पहुंचते हैं. लोग गोलघर की वास्तुकला और इसके ऐतिहासिक महत्व को करीब से देख सकते हैं.

हालांकि, गोलघर की सबसे खास विशेषताओं में से एक इसकी ऊंचाई से शहर को देखने का अनुभव है. सीढ़ियों पर चढ़ने की अनुमति नहीं होने के कारण पिछले कई वर्षों से पर्यटक इस अनुभव से वंचित रहे हैं.

अब प्रस्तावित मरम्मत पूरी होने के बाद यदि सुरक्षा मानकों के तहत लोगों को ऊपर जाने की अनुमति मिलती है,तो यह पटना के पर्यटन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है.

अकाल के बाद अनाज भंडारण के लिए बना था गोलघर

गोलघर सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि बिहार के इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण इमारत है. इसका निर्माण 18वीं सदी में कराया गया था.

जानकारी के अनुसार वर्ष 1770 में बंगाल क्षेत्र में भीषण अकाल पड़ा था. उस समय बंगाल, बिहार और ओडिशा एक ही प्रशासनिक क्षेत्र का हिस्सा थे. अकाल के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी.

इसके बाद भविष्य में खाद्यान्न संकट से निपटने के लिए अनाज के भंडारण की व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत महसूस हुई. इसी उद्देश्य से तत्कालीन गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स के आदेश पर गोलघर के निर्माण की योजना बनाई गई.

जॉन गार्स्टिन ने कराया था निर्माण

गोलघर के निर्माण का जिम्मा ईस्ट इंडिया कंपनी के इंजीनियर जॉन गार्स्टिन को दिया गया था. उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी के मुताबिक इसका निर्माण 20 जनवरी 1784 को शुरू हुआ और लगभग ढाई साल बाद 20 जुलाई 1786 को पूरा हुआ.

गोलघर की मूल कल्पना अनाज भंडारण के लिए की गई थी. हालांकि, समय के साथ यह पटना की सबसे चर्चित ऐतिहासिक इमारतों और शहर की पहचान में शामिल हो गया.

बिना किसी स्तंभ के खड़ा है गोलघर

गोलघर की वास्तुकला इसे खास बनाती है. इसकी ऊंचाई करीब 29 मीटर बताई जाती है. इसकी सबसे खास विशेषताओं में यह तथ्य शामिल है कि विशाल ढांचे के भीतर कोई केंद्रीय स्तंभ नहीं है.

गोलघर की दीवारें लगभग 3.6 मीटर मोटी हैं. इसके ऊपरी हिस्से में करीब तीन मीटर तक ईंटों की जगह पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है.

गोलघर के शीर्ष तक पहुंचने के लिए करीब 142-143 सीढ़ियां बनी हुई हैं. यही सीढ़ियां पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा कारण रही हैं.

पर्यटकों को फिर मिल सकता है पुराना अनुभव

पटना आने वाले पर्यटकों के लिए गोलघर लंबे समय से प्रमुख आकर्षण रहा है. ‘गोलघर पर चढ़कर पटना देखना’ शहर घूमने के अनुभव का हिस्सा माना जाता रहा है. लंबे समय तक बंद रहने के कारण नई पीढ़ी के कई पर्यटक इसके शीर्ष से शहर का दृश्य देखने का अनुभव नहीं ले पाए हैं.

अब करीब 20 करोड़ रुपये की प्रस्तावित परियोजना और छह महीने की समयसीमा के बाद एक बार फिर इसके खुलने की उम्मीद जगी है. हालांकि, गोलघर को आम पर्यटकों के लिए कब खोला जाएगा, इसकी अंतिम तारीख मरम्मत और सुरक्षा संबंधी काम पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगी.

अगर योजना तय समय पर पूरी होती है, तो आने वाले महीनों में पटना के इस ऐतिहासिक स्थल पर फिर से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है.

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