नोएल टाटा के विरोध के बावजूद एन चंद्रशेखरन फिर चुने गए टाटा संस के चेयरमैन,मिला 5 साल का नया कार्यकाल

Tata Sons Chairman N. Chandrasekaran मुंबई: टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमैन पद को लेकर चल रही अनिश्चितता आखिरकार समाप्त हो गई है. बोर्ड के अधिकांश सदस्यों के समर्थन के बाद एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) को अगले 5 वर्षों के लिए फिर से टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त कर दिया गया है.

हालांकि, इस नियुक्ति प्रस्ताव के दौरान ग्रुप के भीतर की अंदरूनी कलह भी खुलकर सामने आ गई. टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा (Noel Tata) ने चंद्रशेखरन को दोबारा चेयरमैन बनाए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया. नोएल टाटा के इकलौते विरोध के बावजूद बाकी सभी बोर्ड मेंबर्स ने चंद्रशेखरन के पक्ष में मतदान किया.

Tata Sons Chairman N. Chandrasekaran:इस्तीफे के एक महीने बाद नाटकीय मोड़

चंद्रशेखरन की यह पुनर्नियुक्ति काफी नाटकीय मोड़ पर हुई है. पिछले महीने ही उन्होंने चेयरमैन पद से इस्तीफे का ऐलान किया था और तीसरे कार्यकाल की दौड़ से खुद को अलग कर लिया था.

  • लीडरशिप में स्पष्टता की मांग: चंद्रशेखरन ने कहा था कि ग्रुप के भीतर लीडरशिप को लेकर स्पष्टता की कमी है. सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने उनके विस्तार की सिफारिश की थी, लेकिन बोर्ड के एक सदस्य के समर्थन न देने के कारण 6 महीने से मामला अटका हुआ था.

  • रणनीतिक परियोजनाओं की चिंता: उन्होंने कहा था कि कई महत्वपूर्ण और नाजुक रणनीतिक प्रोजेक्ट्स के बीच नेतृत्व को लेकर स्थिति साफ होना बेहद जरूरी है.

टाटा संस होगी पब्लिक! बोर्ड ने दी मंजूरी

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक में एक और ऐतिहासिक फैसला लिया गया है. बोर्ड ने टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट (Public Listing) करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.

प्रमुख घटनाक्रमविवरण
टाटा संस चेयरमैनएन चंद्रशेखरन (अगले 5 साल के लिए पुनर्नियुक्त)
विरोध में वोटनोएल टाटा (टाटा ट्रस्ट्स चेयरमैन)
बड़ा फैसलाटाटा संस को पब्लिक (लिस्टेड) कंपनी बनाने की मंजूरी
स्वामित्वटाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की ~66% हिस्सेदारी

नोएल टाटा और चंद्रशेखरन के बीच टकराव का कारण

टाटा ग्रुप में चल रहे इस सत्ता संघर्ष के केंद्र में टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच विचारों का अंतर माना जा रहा है:

  • कंपनी की लिस्टिंग पर आपत्ति: रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोएल टाटा चाहते थे कि चंद्रशेखरन इस बात का आश्वासन दें कि नियामक (RBI) नियमों के बावजूद टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट नहीं किया जाएगा.

  • कर्ज की स्थिति पर चिंता: नोएल टाटा ने ग्रुप के बढ़ते कर्ज और होल्डिंग संरचना पर भी सवाल उठाए थे.

  • पुराने दिग्गजों का इस्तीफा: इस खींचतान के बीच रतन टाटा के करीबी माने जाने वाले दिग्गज नेताओं—जैसे विजय सिंह और मेहली मिस्त्री—पहले ही अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं.

कोरम की कमी से अधर में लटकी AGM

टाटा संस में जारी इस तनातनी का असर कंपनी की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) पर भी पड़ा है. सर रतन टाटा ट्रस्ट्स द्वारा बैठक के लिए अपने प्रतिनिधि नामित न कर पाने के कारण आवश्यक कोरम (गणपूर्ति) पूरा नहीं हो सका, जिससे एजीएम फिलहाल अधर में लटकी हुई है.

चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा संस अब अपने ऐतिहासिक पब्लिक इश्यू (IPO) की दिशा में कदम बढ़ाएगी या अंदरूनी मतभेदों को सुलझाएगी, इस पर पूरे कॉर्पोरेट जगत की नजरें टिकी हैं.

Latest news

Related news