विदिशा। मध्य प्रदेश शासन द्वारा सरकारी स्कूलों के मेधावी विद्यार्थियों के लिए संचालित "मुख्यमंत्री ई-स्कूटी, मोटराइज्ड वाहन योजना" को लेकर नए और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 70 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले स्कूल के टॉपर्स विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ दिया जाएगा। राज्य स्तर पर इस योजना के तहत 19 सितंबर को राजधानी भोपाल के सुभाष उत्कृष्ट उमावि परिसर में आयोजित मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 7,500 से अधिक विद्यार्थियों के खातों में ऑनलाइन राशि ट्रांसफर की जाएगी।
वाहन खरीदना अनिवार्य, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
योजना के प्रावधानों के मुताबिक, विद्यार्थियों या उनके अभिभावकों के बैंक खातों में भेजी जाने वाली राशि से केवल ई-स्कूटी या मोटराइज्ड वाहन ही खरीदना अनिवार्य होगा। यदि कोई छात्र या पालक राशि मिलने के बाद वाहन नहीं खरीदता है, तो शासन स्तर पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विदिशा के जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार के अनुसार, वाहन न खरीदने की स्थिति में विद्यार्थी व पालकों से राशि की पूरी वसूली की जाएगी और संबंधित थाने में एफआईआर तक दर्ज कराई जा सकती है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया गया है।
निर्धारित की गई है वाहन की अधिकतम राशि
पात्र विद्यार्थियों को उनकी पसंद का इलेक्ट्रिक वाहन चुनने की स्वतंत्रता दी गई है। सरकार द्वारा ई-स्कूटी के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपये और दिव्यांग या अन्य पात्र विद्यार्थियों के लिए मोटराइज्ड वाहन के वास्ते अधिकतम 90 हजार रुपये की राशि तय की गई है। यह राशि सीधे विद्यार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी, और यदि छात्र का खाता नहीं है तो उसके माता-पिता या अभिभावक के खाते में जमा कराई जाएगी। इसके अलावा, वाहन के रजिस्ट्रेशन, बीमा (इंश्योरेंस) और एसेसरीज का खर्च भी इसी निर्धारित बजट से संबंधित विक्रेता को चुकाया जाएगा।
तीन साल तक वाहन बेचने पर रहेगा प्रतिबंध
योजना के तहत खरीदे जाने वाले वाहनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, विद्यार्थी इस प्रकार प्राप्त वाहन को तीन साल की अवधि तक न तो बेच सकेगा और न ही किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर कर पाएगा। इस नियम का पालन सुनिश्चित करने के लिए वाहन के रजिस्ट्रेशन के वक्त ही तीन साल का हाइपोथिकेशन (बंधक) दर्ज किया जाएगा, जिससे तय समय सीमा से पहले वाहन का मालिकाना हक बदला न जा सके।

