महिला के साथ हैवानियत की हद, ‘भूत भगाने’ के नाम पर हाथों को जलते कोयले से दागा

धार: मध्य प्रदेश के धार जिले में अंधविश्वास और झाड़-फूंक के नाम पर एक बीमार महिला के साथ गंभीर प्रताड़ना का मामला सामने आया है। धामनोद क्षेत्र की रहने वाली महिला लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थी। चिकित्सीय उपचार से स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार न होने पर परिजन उसे झाबुआ जिले के एक गांव में कथित तांत्रिक के पास ले गए। आरोप है कि वहां आत्मा का साया हटाने के नाम पर महिला के हाथों पर जलते हुए कोयले रख दिए गए और उसके साथ मारपीट की गई। दर्द से तड़पती महिला की स्थिति बिगड़ने पर उसे गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

बीमारी से परेशान होकर झाड़-फूंक कराने झाबुआ पहुंचा था परिवार

पीड़िता के पति के अनुसार, उसकी पत्नी विगत कई दिनों से बीमार चल रही थी। स्थानीय स्तर पर डॉक्टर से इलाज कराने के बावजूद जब उसकी तबीयत ठीक नहीं हुई, तो परिचितों की सलाह पर वे उसे झाबुआ जिले के रूपखेड़ा गांव ले गए। वहां लक्ष्मण नाथ निनामा नामक व्यक्ति ने दावा किया कि महिला पर किसी प्रेत आत्मा का प्रभाव है। इसके पश्चात वह महिला को एकांत कमरे में ले गया और परिजनों को बाहर ही रोक दिया।

कमरे में चीखती रही महिला, हाथों पर रख दिए दहकते कोयले और कंडे

परिजनों का आरोप है कि बंद कमरे के भीतर तांत्रिक क्रिया के नाम पर महिला के दोनों हाथों की हथेलियों पर जलते हुए गोबर के उपले और दहकते कोयले रख दिए गए। इतना ही नहीं, महिला के पेट पर पैर रखकर उसके साथ शारीरिक मारपीट भी की गई। कमरे के अंदर से महिला की दर्दभरी चीखें आती रहीं, किंतु परिजनों को भीतर जाने की अनुमति नहीं दी गई। जब महिला की हालत अत्यधिक नाजुक होने लगी, तब तांत्रिक ने परिजनों को उसे वहां से वापस ले जाने को कहा।

हाथ बुरी तरह झुलसे, धामनोद से धार जिला अस्पताल रेफर

घटना के उपरांत परिजन पीड़िता को तत्काल धामनोद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। प्राथमिक उपचार करने वाले डॉक्टर पंकज धाकड़ ने बताया कि महिला की हथेलियां गंभीर रूप से झुलसी हुई थीं और शरीर पर चोट के निशान थे। प्राथमिक चिकित्सकीय सहायता प्रदान करने के बाद चोटों की गंभीरता को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए धार जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

जागरूकता के अभाव और कुरीतियों का खतरनाक परिणाम

यह हृदयविदारक घटना यह दर्शाती है कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में उचित डॉक्टरी परामर्श के स्थान पर अंधविश्वास का मार्ग चुनना कितना घातक सिद्ध हो सकता है। ग्रामीण अंचलों में बीमारी को दैवीय प्रकोप या भूत-प्रेत से जोड़कर देखने की मानसिकता मरीजों के जीवन को संकट में डाल रही है। सही समय पर पुनः योग्य चिकित्सकों की सलाह न लेने और तांत्रिकों के चंगुल में फंसने से महिला की मूल बीमारी के साथ-साथ उसकी शारीरिक क्षति भी बढ़ गई है।

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