गुना: मध्य प्रदेश के गुना जिले में ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए बड़े पैमाने पर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह पर पुलिस ने शिकंजा कसना तेज कर दिया है। कैंट थाना पुलिस ने चर्चित अमेज़न फ्रॉड मामले में 17 नए कीमती मोबाइल फोन बरामद किए हैं। जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से रिफंड लेने के बाद भी मोबाइल फोन अपने पास रख लेते थे और फिर उन्हें स्थानीय बाजार में बेच देते थे। पुलिस प्रशासन के मुताबिक यह कोई सामान्य धोखाधड़ी नहीं, बल्कि बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया जाने वाला साइबर अपराध है।
ऑर्डर फिर फर्जी रिफंड: जानिए कैसे काम करता था ठगी का नेटवर्क
कैंट पुलिस की जांच में इस गिरोह के काम करने के अनोखे तरीके का खुलासा हुआ है। आरोपी सबसे पहले ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से महंगे और प्रीमियम स्मार्टफोन ऑर्डर करते थे। डिलीवरी प्राप्त होने के बाद फर्जी आधार पर रिफंड की प्रक्रिया पूरी करवा लेते थे और फोन अपने पास ही रख लेते थे। इसके उपरांत, लगभग 90 हजार रुपये की वास्तविक कीमत वाले इन ब्रांड न्यू फोन को स्थानीय दुकानदारों को 80 हजार रुपये के आसपास में बेचकर अवैध मुनाफा कमाते थे।
17 लाख के 17 मोबाइल जब्त, 14 आरोपियों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज
पुलिस टीम ने आरोपियों से पूछताछ और निशानदेही के आधार पर विभिन्न मोबाइल दुकानों से कुल 17 नए स्मार्टफोन जब्त किए हैं, जिनकी कुल बाजार कीमत करीब 17 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस अब इस बिंदु की भी जांच कर रही है कि क्या संबंधित दुकानदारों को इन मोबाइल फोन के फर्जीवाड़े की जानकारी थी या नहीं। गौरतलब है कि कैंट थाना पुलिस ने 2 सितंबर को इस गिरोह के 14 नामजद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। आरोपियों पर बीएनएस (BNS) की धारा 318(4), 319(2), 316(2), 61(2) और आईटी एक्ट की धारा 66(C) व 66(D) के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
मुख्य आरोपी समेत 4 गिरफ्तार, राजस्थान से भी जुड़े नेटवर्क के तार
इस हाई-टेक फ्रॉड मामले में पुलिस पहले ही मुख्य सरगना शोखर मीना और तरुण शर्मा को सलाखों के पीछे भेज चुकी है। उनके पास से 35 लाख रुपये मूल्य की एक लग्जरी इलेक्ट्रिक कार और 3 लाख रुपये के 3 मोबाइल बरामद हुए थे। इसके बाद पुलिस ने सुमित मीना और राजस्थान के बारां जिले के निवासी नमन शर्मा को गिरफ्तार कर पुलिस रिमांड पर लिया। रिमांड के दौरान हुई सघन पूछताछ में मोबाइल की अवैध खरीद-बिक्री के नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग मिले। पुलिस अब बैंक ट्रांजेक्शन, कॉल डिटेल और डिजिटल साक्ष्यों के जरिए गिरोह से जुड़े अन्य फरार सदस्यों की तलाश में दबिश दे रही है।

