भारतीय सेना ने शुरू किया माउंट त्रिशूल पर्वतारोहण अभियान,7120 मीटर की चोटी पर चढ़ेंगे कोर ऑफ इंजीनियर्स

Mount Trishul Mountaineering Expedition: रुड़की: भारतीय सेना की कोर ऑफ इंजीनियर्स ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में एक और चुनौतीपूर्ण अभियान की शुरुआत की है. शनिवार, 5 सितंबर 2026 को रुड़की स्थित बंगाल इंजीनियर ग्रुप एंड सेंटर से माउंट त्रिशूल पर्वतारोहण अभियान को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया. अभियान का उद्देश्य गढ़वाल हिमालय की 7,120 मीटर (23,360 फीट) ऊंची माउंट त्रिशूल चोटी पर सफल आरोहण करना है.

अभियान को भारतीय सेना की साहस, अनुशासन, टीमवर्क और कठिन परिस्थितियों में मिशन पूरा करने की क्षमता का प्रदर्शन करने वाले महत्वपूर्ण प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है.

Mount Trishul Mountaineering Expedition
Mount Trishul Mountaineering Expedition

 

Mount Trishul Mountaineering Expedition: सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ फ्लैग-ऑफ

अभियान के फ्लैग-ऑफ समारोह में सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. इनमें सेंट्रल कमांड के GOC-in-C लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, इंजीनियर-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल विकास रोहेला और बंगाल सैपर्स एंड मिलिट्री सर्वे के कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एसएस दहिया शामिल रहे.

कोर ऑफ इंजिनियर्स के अनुभवी पर्वतारोही अधिकारी भी समारोह में पहुंचे. उन्होंने अभियान दल के सदस्यों से बातचीत की और अपने अनुभव साझा किए.

Mount Trishul Mountaineering Expedition
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7,120 मीटर ऊंची चोटी पर होगी असली परीक्षा

गढ़वाल हिमालय में स्थित माउंट त्रिशूल 7,120 मीटर यानी करीब 23,360 फीट ऊंचा है. अत्यधिक ऊंचाई, तकनीकी रूप से कठिन रास्ते और तेजी से बदलता मौसम इस अभियान को बेहद चुनौतीपूर्ण बनाते हैं.

अभियान दल को चढ़ाई के दौरान शारीरिक क्षमता के साथ-साथ तकनीकी पर्वतारोहण कौशल, मानसिक मजबूती और ऊंचाई वाले वातावरण में प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता का इस्तेमाल करना होगा.

महीनों की तैयारी के बाद मिशन पर निकली टीम

अभियान दल में अनुभवी अधिकारी, जूनियर कमीशंड अधिकारी और अन्य रैंक के जवान शामिल हैं। टीम ने अभियान से पहले व्यापक प्रशिक्षण और तैयारी की है.

इसमें ऊंचाई वाले क्षेत्र में अनुकूलन यानी acclimatisation, कठिन शारीरिक प्रशिक्षण और पर्वतारोहण की तकनीकों का विशेष अभ्यास शामिल रहा. इसके अलावा चढ़ाई के दौरान आने वाली तकनीकी और लॉजिस्टिक चुनौतियों को देखते हुए विस्तृत योजना भी तैयार की गई है.

ऑपरेशनल ब्रीफिंग में समझाया गया पूरा प्लान

फ्लैग-ऑफ समारोह की शुरुआत अभियान टीम के लीडर की विस्तृत प्रस्तुति और ऑपरेशनल ब्रीफिंग से हुई. इसमें प्रस्तावित यात्रा कार्यक्रम, चढ़ाई का मार्ग, समिट अटैक की योजना, सुरक्षा प्रोटोकॉल और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई.

हिमालय में मौसम तेजी से बदलता है और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां अभियान के लिए चुनौती पैदा कर सकती हैं. ऐसे में टीम को सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ना होगा

लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने बढ़ाया टीम का हौसला

समारोह को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने अभियान दल की शारीरिक फिटनेस, मानसिक मजबूती और टीम भावना की सराहना की.

उन्होंने सैपर्स की साहसिक गतिविधियों और पर्वतारोहण की उपलब्धियों की गौरवशाली परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे अभियान नेतृत्व क्षमता, सहनशक्ति, अनुशासन, टीमवर्क और सोच-समझकर जोखिम उठाने की क्षमता को मजबूत करते हैं.

उन्होंने इस तरह के अभियानों को सैन्य तैयारियों के लिए भी महत्वपूर्ण बताया, खासकर उन इलाकों में जहां सैनिकों को बेहद ऊंचाई और कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है.

सौंपा गया एक्सपेडिशन फ्लैग

समारोह के अंत में अभियान टीम के लीडर को औपचारिक रूप से ‘एक्सपेडिशन फ्लैग’ सौंपा गया. इसके साथ ही अभियान दल को बेस कैंप की ओर रवाना किया गया. बेस कैंप पहुंचने के बाद टीम माउंट त्रिशूल की चढ़ाई के अगले चरण को आगे बढ़ाएगी.

‘हर काम देश के नाम’ का संदेश

माउंट त्रिशूल अभियान भारतीय सेना की कोर ऑफ इंजिनियर्स की साहसिक और पर्वतारोहण परंपरा को आगे बढ़ाता है. कठिन परिस्थितियों में अभियान को पूरा करने की तैयारी सेना के जवानों की दृढ़ता, साहस, अनुशासन और टीमवर्क को दर्शाती है.

हर काम देश के नाम’ की भावना के साथ शुरू हुआ यह अभियान न केवल पर्वतारोहण की चुनौती है, बल्कि सैन्य कर्मियों की मानसिक और शारीरिक क्षमता को और मजबूत करने का अवसर भी है.

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