Uttarakhand Ropeway Projects देहरादून : उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को मजबूत करने और पर्यटन को नई ऊंचाई देने के लिए राज्य सरकार रोपवे परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रही है. इसी क्रम में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बुधवार को प्रदेश में संचालित और प्रस्तावित विभिन्न रोपवे परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों को परियोजनाओं में तेजी लाने के साथ-साथ लंबित प्रक्रियाओं और भूमि संबंधी मामलों का प्राथमिकता से निस्तारण करने के निर्देश दिए.
मुख्य सचिव ने विशेष रूप से रोपवे रेग्यूलेशन और रूल्स को जल्द जारी करने पर जोर दिया. उन्होंने ब्रिडकुल को प्रदेश में रोपवे परियोजनाओं के प्रभावी संचालन और नियमन के लिए आवश्यक नियम जल्द तैयार कर जारी करने के निर्देश दिए.

Uttarakhand Ropeway Projects: पर्वतीय क्षेत्रों में रोपवे बनेगा कनेक्टिविटी का मजबूत विकल्प
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में रोपवे केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर बन सकता है.
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी रोपवे परियोजनाओं में समयबद्धता और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए. संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर परियोजनाओं को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए.
मुख्य सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजनाओं में आने वाली छोटी-बड़ी बाधाओं को लंबे समय तक लंबित न रखा जाए.
रोपवे परियोजनाओं में पार्किंग होगी अनिवार्य
समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने रोपवे परियोजनाओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण पहलू पर विशेष जोर दिया. उन्होंने निर्देश दिए कि हर रोपवे परियोजना की योजना में पार्किंग डेवलपमेंट को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए.
उन्होंने कहा कि केवल रोपवे का निर्माण कर देना पर्याप्त नहीं है. पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए रोपवे स्टेशन तक पहुंचने, वाहन खड़े करने और आगे की यात्रा को सुविधाजनक बनाने की समुचित व्यवस्था भी जरूरी है.
उत्तराखंड में पर्यटन सीजन के दौरान प्रमुख धार्मिक और पर्यटक स्थलों पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है. ऐसे में रोपवे के साथ पार्किंग सुविधा विकसित होने से सड़कों पर यातायात का दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है.
केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे पर खास फोकस
मुख्य सचिव ने बैठक में केदारनाथधाम और हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की. उन्होंने संबंधित एजेंसियों को परियोजनाओं की आगामी कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश दिए.
उन्होंने जिला प्रशासन और कार्यदायी संस्था के बीच बेहतर समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नामित करने के निर्देश दिए, ताकि भूमि, प्रशासनिक अनुमति और अन्य स्थानीय स्तर की समस्याओं का तेजी से समाधान किया जा सके.
केदारनाथ और हेमकुंड साहिब दोनों ही उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक गंतव्य हैं. इन क्षेत्रों में रोपवे बनने से भविष्य में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आवागमन को अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने में मदद मिल सकती है.
नैनीताल की रोपवे परियोजनाओं पर भी बड़ा अपडेट
बैठक में नैनीताल क्षेत्र में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई.
मुख्य सचिव ने रानीबाग-ज्योलीकोट-हनुमानगढ़ी-कैंचीधाम और रानीबाग-भीमताल-भवाली रोपवे परियोजनाओं में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.
उन्होंने NHLML और UKMRC को आपसी समन्वय के साथ इन परियोजनाओं का इंटीग्रेशन सुनिश्चित करने को कहा.
मुख्य सचिव ने UKMRC से संबंधित प्रोजेक्ट के फाइनल अप्रूवल की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए. इसके साथ ही फाइनल DPR और DFC से संबंधित प्रक्रियाओं को भी समयबद्ध तरीके से पूरा करने को कहा गया.
औली से लेकर पुरकुल तक कई परियोजनाओं की समीक्षा
बैठक में पर्यटन विभाग की ओर से विकसित की जा रही कई रोपवे परियोजनाओं की भी समीक्षा हुई.
इनमें प्रमुख रूप से जोशीमठ-औली-गोरसों रोपवे,रैथल-बारसू रोपवे और पुरकुल रोपवे शामिल हैं.
मुख्य सचिव ने इन परियोजनाओं की नियमित और प्रभावी मॉनिटरिंग करने को कहा. उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि परियोजनाओं में अनावश्यक देरी न हो.
यमुनोत्री और पूर्णागिरि रोपवे पर भी तेजी के निर्देश
बैठक में यमुनोत्री-जानकी चट्टी, हनुमानचट्टी-पूर्णागिरि और तपोवन-कुंजपुरा रोपवे परियोजनाओं की प्रगति भी देखी गई.
मुख्य सचिव ने इन परियोजनाओं से संबंधित लंबित कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए.
उन्होंने खास तौर पर भूमि संबंधी मामलों के शीघ्र समाधान पर जोर दिया. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि भूमि से जुड़े विषयों के कारण परियोजनाओं की आगे की कार्यवाही में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए.
रोपवे से पर्यटन और यातायात व्यवस्था को मिलेगी नई दिशा
उत्तराखंड में हर साल बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं. चारधाम यात्रा, हेमकुंड साहिब, कैंचीधाम, औली, नैनीताल और अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटन सीजन के दौरान यातायात का दबाव काफी बढ़ जाता है.
ऐसे में सरकार रोपवे को पर्वतीय क्षेत्रों में तेज, सुविधाजनक और पर्यावरण के लिहाज से महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी विकल्प के तौर पर विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
रोपवे परियोजनाओं के सफल संचालन से जहां पर्यटकों को सुविधा मिलेगी, वहीं दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय लोगों के लिए भी आवागमन आसान हो सकता है.
अब नियम और रेग्यूलेशन जारी करने की तैयारी
बैठक में सबसे अहम निर्देशों में से एक प्रदेश में रोपवे परियोजनाओं के संचालन और नियमन के लिए रोपवे रेग्यूलेशन और रूल्स जल्द जारी करने का रहा.
ब्रिडकुल को इसके लिए आवश्यक कार्रवाई तेजी से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं.
नियम और रेग्यूलेशन लागू होने के बाद प्रदेश में रोपवे परियोजनाओं के निर्माण, संचालन, सुरक्षा और नियमन से जुड़े मामलों को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
सरकार का फोकस-समय पर पूरी हों परियोजनाएं
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि रोपवे परियोजनाओं में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी. सभी संबंधित विभागों, जिला प्रशासन और कार्यदायी संस्थाओं को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा.
उन्होंने कहा कि लंबित प्रक्रियाओं, भूमि संबंधी मामलों और विभागीय समन्वय से जुड़े विषयों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए.
बैठक में सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, अपर सचिव विनीत कुमार, NHLML और UKMRC के अधिकारियों के साथ संबंधित जिलों के जिलाधिकारी भी मौजूद रहे.
उत्तराखंड सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी सुधारने के लिए रोपवे नेटवर्क को विस्तार देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. केदारनाथ, हेमकुंड साहिब, कैंचीधाम, नैनीताल, औली, यमुनोत्री और पूर्णागिरि जैसे प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को रोपवे से जोड़ने की योजनाओं पर सरकार का विशेष जोर है.
मुख्य सचिव के निर्देशों के बाद अब इन परियोजनाओं में लंबित भूमि, DPR, अप्रूवल और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करने की उम्मीद है. साथ ही रोपवे के साथ पार्किंग को अनिवार्य किए जाने से इन परियोजनाओं को केवल परिवहन सुविधा के बजाय समग्र पर्यटन और यातायात समाधान के रूप में विकसित करने की दिशा भी स्पष्ट होती है.

