नए खनिज कानून पर केंद्र से भिड़ी हेमंत सरकार, सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी 

Jharkhand Mining Law रांची : झारखंड में खनिज संसाधनों से होने वाली आय को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने केंद्र के संशोधित Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Act, 2026 (MMDR Act) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है. राज्य सरकार का आरोप है कि नए प्रावधानों से झारखंड के खनिज राजस्व पर गंभीर असर पड़ सकता है.

Jharkhand Mining Law : नए MMDR Act के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार

झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 26 अगस्त को कहा था कि राज्य सरकार संशोधित MMDR कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस संबंध में कार्रवाई को मंजूरी दे दी है.

राज्य सरकार का कहना है कि नए कानून से खनिज संपदा वाले राज्यों की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है. सरकार विशेष रूप से राज्य द्वारा खनिज और खनिज-युक्त भूमि पर लगाए जाने वाले कर, उपकर और अन्य शुल्क से जुड़े अधिकारों को लेकर चिंतित है.

झारखंड को ₹14 हजार करोड़ के राजस्व नुकसान का दावा

वित्त मंत्री के मुताबिक, संशोधित कानून लागू होने से झारखंड को चालू वित्त वर्ष में करीब 14,000 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है. राज्य सरकार का कहना है कि इस रकम का इस्तेमाल विभिन्न विकास और कल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जाना था.

सरकार ने यह भी तर्क दिया है कि खनन से मिलने वाला राजस्व झारखंड की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कानून पर पुनर्विचार करने की अपील की थी.

खनिज राजस्व झारखंड के लिए क्यों अहम?

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में बताया था कि वित्त वर्ष 2024-25 में खनन से मिलने वाला राजस्व झारखंड के अपने गैर-कर राजस्व का करीब 84.9 प्रतिशत था. राज्य सरकार ने यह भी कहा था कि Mineral Bearing Land Cess से लगभग 11,000 करोड़ रुपये सालाना मिलने की उम्मीद थी.

यही वजह है कि हेमंत सोरेन सरकार नए कानून को केवल खनन से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि राज्य की वित्तीय स्वायत्तता और विकास योजनाओं से जुड़ा मुद्दा बता रही है.

हेमंत सोरेन ने केंद्र पर साधा निशाना

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि झारखंड सरकार इस कानून का विरोध लोकतांत्रिक, संवैधानिक और कानूनी तरीके से करेगी. सोरेन का आरोप है कि खनिज संपदा वाले राज्यों को विश्वास में लिए बिना कानून में बदलाव किया गया.

उन्होंने यह भी कहा है कि नए प्रावधानों का असर झारखंड के आदिवासी, दलित, पिछड़े, किसान और गरीब वर्गों पर पड़ सकता है.

क्या है केंद्र का नया खनिज कानून?

संसद ने अगस्त 2026 में MMDR Amendment Act, 2026 पारित किया. कानून का उद्देश्य खनन क्षेत्र में कर व्यवस्था को अधिक एकरूप और पूर्वानुमान योग्य बनाना बताया गया है. इसके तहत राज्यों की ओर से खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर नए कर, सेस या अन्य शुल्क लगाने की शक्तियों पर कुछ सीमाएं तय की गई हैं.

यही प्रावधान झारखंड समेत कुछ खनिज संपदा वाले राज्यों की चिंता का मुख्य कारण बने हैं. विपक्षी दलों का भी आरोप है कि कानून से राज्यों के वित्तीय अधिकार प्रभावित होंगे.

आगे क्या होगा?

अब झारखंड सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने के बाद मामला संवैधानिक और कानूनी बहस का रूप ले सकता है. केंद्र और राज्यों के बीच खनिज संसाधनों पर अधिकार, कर लगाने की शक्ति और राजस्व बंटवारे से जुड़े सवालों पर अदालत का रुख महत्वपूर्ण होगा.

झारखंड सरकार के इस कदम से खनिज संपदा वाले राज्यों और केंद्र के बीच वित्तीय अधिकारों को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है.

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