28 अगस्त को रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण, 5 सरल प्वाइंट में जानें पूरी जानकारी, नहीं रहेगा कोई कनफ्यूजन

अगस्त दिन शुक्रवार को रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण लगने वाला है. रक्षाबंधन का पर्व हर वर्ष सावन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है लेकिन इस बार भाई-बहन के पावन पर्व पर चंद्र ग्रहण का साया भी रहने वाला है. यह साल 2026 का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण है. ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या इस ग्रहण का असर रक्षाबंधन और राखी बांधने की परंपरा पर पड़ेगा? क्या इस दिन सूतक काल मान्य होगा और क्या बहनें अपने भाइयों को राखी बांध सकेंगी? आइए 5 आसान प्वाइंट में जानते हैं चंद्र ग्रहण से जुड़ी पूरी जानकारी.

    28 अगस्त को लगने वाला आंशिक चंद्र ग्रहण सुबह 8 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और इसका समापन सुबह 11 बजकर 22 मिनट पर होगा. सावन मास की पूर्णिमा तिथि के लगने वाले इस ग्रहण की कुल अवधि करीब 3 घंटे 18 मिनट रहने वाली है.
    इस चंद्र ग्रहण को लेकर भारत में रहने वाले लोगों के लिए सबसे राहत वाली बात यह है कि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब ग्रहण किसी स्थान पर दिखाई नहीं देता, तो वहां सामान्यतः ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं माना जाता. इसलिए रक्षाबंधन के पर्व पर ग्रहण के कारण किसी तरह की रोक नहीं होगी. राखी बांधने को लेकर स्थानीय पंचांग में दिए गए शुभ मुहूर्त का पालन किया जा सकता है. यानी चंद्र ग्रहण के कारण रक्षाबंधन की परंपरा में किसी तरह का बदलाव आवश्यक नहीं होगा.
    यह आंशिक चंद्र ग्रहण भारत के अलावा दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देने की संभावना बताई गई है. इनमें अफ्रीका के ज्यादातर हिस्से, उत्तर और दक्षिण अमेरिका, यूरोप तथा दक्षिण-पश्चिम एशिया शामिल हैं. इसके अलावा अफगानिस्तान, पाकिस्तान, इराक, ईरान, सऊदी अरब और शारजाह समेत कुछ अन्य क्षेत्रों में भी ग्रहण देखा जा सकेगा. हिंद, प्रशांत और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों से भी इसकी दृश्यता बताई गई है.

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यह ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में लगेगा. ग्रहण सिंह-कुंभ अक्ष पर होगा, जिसमें सूर्य सिंह राशि और चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित रहेगा. शतभिषा नक्षत्र का संबंध राहु से माना जाता है, इसलिए ज्योतिष की दृष्टि से भी इस ग्रहण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
वैज्ञानिक दृष्टि से आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा का कुछ हिस्सा पृथ्वी की छाया में आ जाता है. आमतौर पर चंद्रमा सफेद-मटमैला या हल्का गहरा दिखाई दे सकता है. इस बार करीब 93 से 96 फीसदी चंद्रमा ढकने की स्थिति में अधिकतम ग्रहण के दौरान चंद्रमा हल्का तांबे जैसा या गहरा लाल दिखाई दे सकता है. यही वजह है कि यह नजारा काफी हद तक ‘ब्लड मून’ जैसा आकर्षक नजर आ सकता है.
रक्षाबंधन का मुहूर्त सुबह 5:57 AM से सुबह 9:48 AM तक (पूर्णिमा तिथि समाप्ति तक) रहेगा. इस अवधि में बिना किसी डर के राखी बांधी जा सकती है. सूतक ना होने की वजह से मंदिर खुले रहेंगे, पूजा-पाठ जारी रहेगा, और भोजन या गर्भवती महिलाओं के लिए किसी भी तरह का नियम मानने की आवश्यकता नहीं है.

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