नई दिल्ली। घरेलू बाजार और वैश्विक व्यापार परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने गेहूं के आटे और उससे जुड़े अन्य उत्पादों के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है। सरकार के इस कदम के बाद अब भारतीय व्यापारी गेहूं का आटा, मैदा, सूजी, साबुत गेहूं का आटा (होल मील आटा) और इससे संबंधित अन्य उत्पादों को बिना किसी पाबंदी के विदेशों में भेज सकेंगे। सोमवार को निर्यात नीति में संशोधन करते हुए सरकार ने इन सभी उत्पादों को फिर से मुक्त निर्यात की श्रेणी में शामिल कर दिया है।
वर्ष 2022 में लगाई गई थी पाबंदी
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने 12 जुलाई 2022 को गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने का फैसला किया था। उस समय देश के भीतर गेहूं और आटे की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना सरकार की पहली प्राथमिकता थी।
रूस-यूक्रेन युद्ध का वैश्विक असर
2022 में रूस और यूक्रेन के बीच शुरू हुए युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में गेहूं के दाम में लगभग 40 प्रतिशत तक का उछाल आया था। ब्लैक सी (काला सागर) क्षेत्र, जो दुनिया के कुल गेहूं व्यापार के करीब एक-चौथाई हिस्से का संचालन करता है, वहां से आपूर्ति और परिवहन बाधित हो गया था। इस वजह से दुनिया भर में खाद्य संकट गहरा गया था और भारत से भारी मात्रा में गेहूं का निर्यात होने लगा था, जिसे रोकने के लिए पाबंदी लगाना आवश्यक हो गया था।
चार साल बाद पूरी तरह मिली राहत
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भूमिका निभाते हुए सरकार ने बीच में निर्यात नियमों में कुछ ढील दी थी और प्रति वर्ष अधिकतम 50 लाख टन निर्यात की सीमा तय की थी। हालांकि, अब लिए गए नए फैसले के बाद वर्ष 2022 के बाद पहली बार गेहूं के आटे और संबंधित उत्पादों के निर्यात को पूरी तरह से पाबंदी मुक्त कर दिया गया है।

