जापान दौरे पर गोयल का सख्त अंदाज, व्यापार संतुलन से लेकर साझेदारी तक रखी भारत की बात

टोक्यो: जापान दौरे पर पहुंचे केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने टोक्यो में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और सरकार की नीतियों को बेहद स्पष्ट शब्दों में रखा। उन्होंने जापानी उद्योग जगत को भारत में निवेश का निमंत्रण देने के साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि भारत अपनी शर्तों और राष्ट्रीय हितों से समझौता किए बिना निवेशकों का स्वागत कर रहा है।

बौद्धिक संपदा सुरक्षा और 'चीन प्लस वन' नीति पर तंज

पीयूष गोयल ने बिना नाम लिए चीन पर सीधा निशाना साधते हुए भारत को डेटा सेंटर और व्यापार का सबसे भरोसेमंद ठिकाना बताया। उन्होंने कहा कि भारत में बौद्धिक संपदा (IPR) और उद्यमशीलता का सम्मान किया जाता है तथा यहां डेटा चोरी का कोई खतरा नहीं है।

तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि भारत में किसी सफल कारोबारी को अचानक गायब होकर किसी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बनने की चिंता नहीं करनी पड़ती। इसके साथ ही उन्होंने भारत को महज किसी देश का 'विकल्प' मानने से इनकार करते हुए कहा कि भारत अपनी खूबियों और तकनीक के दम पर खड़ा एक स्वतंत्र एवं मजबूत साझेदार है।

समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट समाधान और स्पष्ट रुख

कारोबार की सुगमता को साबित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सेमीकंडक्टर और ऑटो कंपोनेंट क्षेत्र की दो बड़ी जापानी कंपनियों की अड़चनों को बैठक के दौरान ही फोन कॉल के जरिए तुरंत सुलझा दिया गया। उन्होंने आश्वासन दिया कि भारत अगले दो महीनों में संबंधित नियमों में आवश्यक संशोधन करेगा।

हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि जहां मांगें वाजिब होंगी, वहां तुरंत फैसले लिए जाएंगे, लेकिन अनुचित डंपिंग या रियायतों के मामलों में सरकार बिल्कुल नहीं झुकेगी।

इस्पात उद्योग पर जापानी कंपनियों को दिखाया आईना

जापानी इस्पात उद्योग द्वारा सुरक्षा शुल्क (सफिशिएंट ड्यूटी) में ढील की मांग पर मंत्री ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे देशों ने 50% तक सुरक्षा शुल्क लगाया है, जबकि भारत ने केवल 12% लगाया है।

उन्होंने सवाल उठाया कि पिछले सात वर्षों से अपील के बावजूद जापानी कंपनियां सस्ता और गुणवत्तापूर्ण भारतीय इस्पात नहीं खरीद रही हैं। ऐसे में वे भारत से राहत की उम्मीद कैसे कर सकती हैं? उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एंटी-डंपिंग और सुरक्षा शुल्क संबंधी फैसले एक स्वतंत्र प्राधिकरण द्वारा डब्ल्यूटीओ (WTO) के नियमों के तहत लिए जाते हैं, जिसमें मंत्रालय का सीधा हस्तक्षेप नहीं होता।

निवेश के लिए भारत की मजबूत पेशकश

जापानी निवेशकों के सामने भारत ने दो मुख्य उभरते क्षेत्रों में अपनी प्रगति और संभावनाओं को प्रस्तुत किया:

  • सेमीकंडक्टर क्षेत्र: 'सेमीकॉन 2.0' के तहत ₹1.27 लाख करोड़ का परिव्यय तय किया गया है। प्रथम चरण में ₹76,000 करोड़ की 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिससे ₹1.64 लाख करोड़ का निवेश आया है। अगले 1.5 वर्षों में 50 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश जुटाने का लक्ष्य है, जबकि अगले 5 वर्षों में भारत की सालाना सेमीकंडक्टर मांग 150 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

  • ऊर्जा क्षेत्र: भारत की सौर ऊर्जा क्षमता 2014 के 2 गीगावाट से बढ़कर अब 160 गीगावाट से अधिक हो चुकी है, जिसे अगले 3 वर्षों में 250 गीगावाट तक ले जाने का लक्ष्य है। देश की कुल 552 गीगावाट स्थापित बिजली क्षमता में 54% से अधिक हिस्सेदारी गैर-जीवाश्म स्रोतों की है। इसके अलावा 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता जोड़ने की योजना है।

Latest news

Related news