जबलपुर: मध्य प्रदेश के जबलपुर की पाटन विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक और पूर्व मंत्री अजय बिश्नोई ने प्रदेश की खराब सड़कों और निर्माण कार्यों में हो रही भारी देरी को लेकर अपनी ही पार्टी की सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विधायक ने कहा है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और लोक निर्माण विभाग (PWD) के अंतर्गत बनने वाली सड़कों की वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। कम दरों पर ठेके लेने के कारण निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से हो रहा समझौता आम जनता के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन गया है।
मुख्यमंत्री को लिखा पत्र और विकास कार्यों में देरी
विधायक अजय बिश्नोई ने राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर क्षेत्र की सड़कों की बदहाल स्थिति से अवगत कराया है। उनका कहना है कि ठेकेदार कम दरों पर टेंडर हासिल तो कर लेते हैं, लेकिन बाद में लागत और मुनाफे का संतुलन न बैठ पाने के कारण इसका सीधा असर निर्माण की गुणवत्ता पर पड़ता है। परिणामस्वरूप, करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली सड़कें कुछ ही समय में उखड़ने लगती हैं।
पाटन क्षेत्र के मझौली ब्लॉक की पौड़ा से पचैया तक बनने वाली सड़क का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि इस सड़क का निर्माण कार्य तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं हो सका है और इस दौरान तीन बार पेटी ठेकेदार बदले जा चुके हैं। इसके अलावा मझौली नगर में करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली सड़क का काम भी तकनीकी कारणों और बार-बार टेंडर प्रक्रिया में अटकने के कारण शुरू नहीं हो पाया है।
भ्रष्टाचार और प्रशासनिक तंत्र पर सवाल
विधायक ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनने वाली सड़कों के रखरखाव (मेंटेनेंस) पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई ठेकेदार पांच साल की मेंटेनेंस जिम्मेदारी को पूरा नहीं करते और अदालती मामलों के कारण सुधार कार्य प्रभावित होते हैं। बिश्नोई ने स्पष्ट किया कि इस पूरी समस्या को सिर्फ राजनीतिक विरोध के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके पीछे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार मुख्य कारण हैं। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधारनी है, तो टेंडर प्रक्रिया से लेकर निर्माण, भुगतान और मेंटेनेंस तक पूरी व्यवस्था की कड़ी निगरानी करनी होगी।

