अमेरिका की आर्थिक जंग पर ईरान का बड़ा बयान, साथ देने वाले देशों को दी चेतावनी

तेहरान। ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रेजाई ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी आर्थिक लड़ाई में शामिल होने वाले किसी भी देश को तेहरान का सीधा दुश्मन माना जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान पहले संबंधित देशों से कूटनीतिक बातचीत के जरिए इस विवाद से दूर रहने की अपील करेगा, लेकिन बात न मानने पर उनके आर्थिक और सामरिक हितों को निशाना बनाया जाएगा।

हॉर्मुज स्ट्रैट से तेल निर्यात रोकने की धमकी

रेजाई ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि पड़ोसी देश अमेरिका द्वारा किए जा रहे आर्थिक घेराव में भाग लेते हैं, तो ईरान हॉर्मुज स्ट्रैट (Hormuz Strait) से तेल का निर्यात पूरी तरह ठप कर देगा। उन्होंने कहा कि ईरान ने वर्षों के कड़े प्रतिबंधों के बावजूद तेल बेचने और आर्थिक रास्तों को चालू रखने के तरीके सीख लिए हैं। उन्होंने दोहराया कि हॉर्मुज स्ट्रैट की नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक वॉशिंगटन जून में हुए ईरान-अमेरिका शांति समझौते की शर्तों को पूरा करने की दिशा में पहला कदम नहीं उठाता।

अमेरिका का 'अधिकतम दबाव' अभियान फिर होगा नाकाम

इधर, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी अमेरिका के आर्थिक अभियानों को विफल करार दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर उन्होंने लिखा कि पिछले 14 वर्षों में लागू किए गए सबसे कड़े प्रतिबंध, आठ साल पहले का 'अधिकतम दबाव' और पांच महीने पहले बिना शर्त आत्मसमर्पण कराने की कोशिशें पूरी तरह नाकाम रही हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका का ताजा आर्थिक हमला भी उसी हश्र का शिकार होगा।

डोनाल्ड ट्रंप ने दिया 'इकोनॉमिक डी-डे' का नारा

ईरान के यह सख्त बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस घोषणा के बाद आए हैं, जिसमें उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा था कि ईरान को आर्थिक मदद देने वाले देशों पर अब तक का सबसे भीषण आर्थिक अभियान चलाया जाएगा। ट्रंप ने इसे अभूतपूर्व स्तर का "इकोनॉमिक डी-डे" (Economic D-Day) करार दिया है। बता दें कि 18 जून को दोनों देशों के बीच 60 दिनों के भीतर शांति वार्ता पूरी करने का समझौता हुआ था, जिसकी समय-सीमा समाप्त होने के बाद अब दोनों पक्षों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है।

 

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