Amit Shah Gorkhaland नई दिल्ली:नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में गोरखा नेताओं, पश्चिम बंगाल सरकार और अन्य हितधारकों की उच्चस्तरीय बैठक के बाद गोरखा मुद्दे के स्थायी राजनीतिक समाधान की दिशा में एक बड़ी पहल की गई है। भाजपा सांसद राजू बिस्टा ने बताया कि गृह मंत्रालय ने मध्यस्थ पंकज कुमार सिंह के नेतृत्व में एक विशेष समिति का गठन किया है, जो बैठक में बनी सहमति के आधार पर अंतिम समझौते का मसौदा तैयार करेगी। यह घटनाक्रम 1988 के ऐतिहासिक गोरखा समझौते की वर्षगांठ के अवसर पर सामने आया है।
Amit Shah Gorkhaland : समिति को सौंपा गया मसौदा तैयार करने का काम
शाह के उत्तर बंगाल दौरे के अंतिम दिन सिलिगुड़ी के समीप सुकना में यह महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई. इसमें पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधि, पहाड़ी क्षेत्रों के प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता और अन्य हितधारक शामिल हुए. सांसद राजू बिस्टा ने जानकारी दी कि पंकज कुमार सिंह के नेतृत्व वाली समिति इस बैठक में तय हुए बिंदुओं के आधार पर समझौते का प्रारूप तैयार करने का कार्य करेगी.
पंकज कुमार सिंह की मुख्य भूमिका
उल्लेखनीय है कि गृह मंत्रालय ने पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी पंकज कुमार सिंह को इस विषय पर आधिकारिक सरकारी मध्यस्थ नियुक्त किया था. उनका मुख्य कार्य गोरखा समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांगों के समाधान हेतु राजनीतिक वार्ताओं को दिशा देना है.
1988 के समझौते से जुड़ा ऐतिहासिक दिन
दार्जिलिंग के सांसद ने कहा कि यह बैठक एक ऐतिहासिक दिन पर आयोजित हुई, क्योंकि 1988 में केंद्र, राज्य सरकार और गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (GNLF) के बीच इसी तारीख को समझौता हुआ था. उसी ऐतिहासिक समझौते के बाद दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल (DGHC) की स्थापना की गई थी.
चार दशक पुराने संघर्ष को खत्म करने की पहल
बिस्टा के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों के निवासियों का यह संघर्ष चार दशकों से भी अधिक पुराना है. बैठक के दौरान विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों ने अपनी मांगों, समस्याओं और अपेक्षाओं को गृह मंत्री के समक्ष विस्तार से रखा.
संवैधानिक दायरे में होगा समाधान
इस वार्ता के दौरान दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों की लंबित मांगों का भारतीय संविधान की सीमाओं के भीतर रहते हुए एक “स्थायी राजनीतिक समाधान” निकालने पर विस्तृत चर्चा हुई.
बैठक में प्रमुख नेताओं की उपस्थिति
बैठक में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के प्रमुख बिमल गुरुंग, वरिष्ठ नेता रोशन गिरी, GNLF प्रमुख मान घिसिंग, पश्चिम बंगाल सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
स्थायी शांति की ओर कदम
पूर्व की सरकारों द्वारा लागू की गई DGHC और गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (GTA) जैसी व्यवस्थाओं के बावजूद क्षेत्र में पूर्ण राजनीतिक स्थिरता और स्थायी शांति कायम नहीं हो सकी थी. ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा गठित इस नई समिति से क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास की उम्मीदें बढ़ गई हैं.

