Akhilesh Yadav: इंदौर में नज़र आई यूपी सियासत की बदली तस्वीर, क्या मायावती को आज़ाद करेंगे रिप्लेस

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के जन्मदिन पर इंदौर में यूपी की सियासत की नई तस्वीर देखने को मिली. समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने यहां के डॉ. अम्बेडकर नगर में आज़ाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद के साथ डॉ. भीमराव अम्बेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की.

अखिलेश क्या अपने MY समीकरण में D जोड़ने का प्लान बना रहे हैं

पहले स्वामी प्रसाद मौर्या और अब चंद्रशेखर आज़ाद के साथ अखिलेश यादव यूपी की राजनीति में क्या करने की कोशिश कर रहे हैं. क्या वो बीएसपी और मायावती को खत्म करने की फिराक में हैं.
रामायण को लेकर स्वामी प्रसाद मौर्या ने जो यूपी की सियासत में हलचल पैदा की क्या अब चंद्रशेखर आज़ाद के साथ उस हलचल को ज़मीन पर उतारने जा रहे हैं अखिलेश यादव. क्या इस बार अखिलेश का इरादा अपने MY में D यानी मुसलिम और यादव के बाद दलित को जोड़ने का है. ऐसा गठजोड़ तैयार करने का है जिसका जवाब सीएम योगी तो क्या बीजेपी के पास भी न हो.

आज़ाद क्या मायावती की सियासत को खत्म कर देंगे

लंबे समय से पूरे देश खास कर दलित मुद्दों पर संघर्ष करते नज़र आने वाले भीम आर्मी के चंद्रशेखर आज़ाद दलित युवाओं में काफी पकड़ बना रहे हैं. मायावती और बीएसपी से इतर वो सड़क पर लड़ाई लड़ने में विश्वास करते हैं. बीएसपी सुप्रीमो हर मुद्दे पर सिर्फ प्रेस वार्ता या प्रेस विज्ञप्ति से काम चला लेती हैं. ऐसे में बदलती राजनीति में दलित युवा मायावती के साइलेंट अटैक से ज्यादा चंद्रशेखर के सड़क पर दिखने वाले संघर्ष को पसंद करने लगा है.चंद्रशेखर का एग्रेसिव अप्रोच दलितों को उनकी ओर खींच रहा है.

असद एनकाउंटर के बहाने अखिलेश ने खेला ब्राह्मण कार्ड

इंदौर में एक तरफ आज़ाद तो दूसरी तरफ असद एनकाउंटर के बहाने अखिलेश ने खेला ब्राह्मण कार्ड. अखिलेश यादव ने न सिर्फ असद के एनकाउंटर को फर्ज़ी बताया बल्कि ये भी कह दिया कि, “पहले दिन से BJP चुनाव को देखते हुए एनकाउंटर कर रही है. मैं BJP से पूछना चाहता हूं कि जिन अधिकारियों ने एक ब्राह्मण मां-बेटी पर बुलडोज़र चलाया उन्हें क्यों नहीं मिट्टी में मिलाया?…क्या आज का भारत यह है कि कमज़ोर की जान ले लें? क्या संविधान में जो अधिकार है वो नहीं मिलेंगे?”

यानी अखिलेश यादव 2027 की तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते. कुछ दिनों पहले वो स्वामी प्रसाद मौर्या के साथ बीएसपी के संस्थापक कांशीराम की मूर्ति का अनावरण करते नज़र आए थे. अब वह चंद्रशेखर आज़ाद के साथ दिखे हैं. लगता है इस बार अखिलेश अपने MY के साथ ही ब्राह्मण, दलित को जोड़ कर योगी आदित्यनाथ के सामने एक मजबूत विपक्ष खड़ा करना चाहते हैं.

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