Rahul Gandhi DA Case नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को आय से अधिक संपत्ति के मामले (Rahul Gandhi Disproportionate Assets-Case) में सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए शिकायतकर्ता को याचिका की कॉपी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से कहा है कि वह 20 अगस्त को होने वाली प्रस्तावित सुनवाई को फिलहाल टाल दे. साथ ही कोर्ट ने CBI और अन्य जांच एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे फिलहाल हाई कोर्ट के समक्ष अपनी कोई रिपोर्ट पेश न करें.
राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें मामले की CBI और ED जांच का आदेश दिया गया था.
Rahul Gandhi DA Case:राहुल गांधी क्यों पहुंचे सुप्रीम कोर्ट?
यह मामला बीजेपी कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर की ओर से दाखिल याचिका से जुड़ा है. याचिका में राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर कथित तौर पर करीब 60 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया गया था. शिकायतकर्ता ने इसे राहुल गांधी की घोषित आय से अधिक बताते हुए जांच की मांग की थी.
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने मामले में CBI और ED जांच का आदेश दिया था. इसी आदेश के खिलाफ राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.
कपिल सिब्बल ने हाई कोर्ट की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
राहुल गांधी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पेश हुए.चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच के सामने सिब्बल ने हाई कोर्ट में अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए.
सिब्बल ने दलील दी कि इस तरह की प्रक्रिया पहले देखने को नहीं मिली. उनका कहना था कि शिकायतकर्ता का कथित तौर पर मामले से सीधा संबंध नहीं है, फिर भी उसकी याचिका को बंद चैंबर में सुना गया.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाई कोर्ट को सीलबंद लिफाफे में दी जाने वाली जानकारियां मीडिया में लीक हो रही थीं.
राहुल गांधी का पक्ष नहीं सुना गया: सिब्बल
कपिल सिब्बल ने यह भी कहा कि मामले में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं किया गया. उनका तर्क था कि राहुल गांधी का पक्ष सुने बिना एकतरफा आदेश दिया गया.
सिब्बल ने शिकायतकर्ता विग्नेश शिशिर को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि वह RSS से जुड़े हुए हैं तथा अलग-अलग याचिकाओं के जरिए राहुल गांधी को निशाना बनाते रहते हैं.
विग्नेश शिशिर ने राहुल गांधी की याचिका का विरोध किया
सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े शिकायतकर्ता विग्नेश शिशिर ने राहुल गांधी की याचिका का विरोध किया.
उन्होंने दलील दी कि किसी शिकायत की शुरुआती जांच के दौरान प्रस्तावित आरोपी को सुनने का प्रावधान नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें राहुल गांधी की याचिका की कॉपी दी जानी चाहिए, ताकि वह अपना जवाब दाखिल कर सकें.
इस पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सहमति जताई और शिकायतकर्ता को याचिका की कॉपी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया.
CBI ने क्या कहा?
CBI की ओर से कोर्ट में पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि एजेंसी फिलहाल केवल शुरुआती जांच कर रही है. उनके मुताबिक, इस जांच के बाद ही केस दर्ज करने को लेकर फैसला लिया जा सकता है.
CBI की ओर से यह भी कहा गया कि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं, इस स्तर पर उस पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. एजेंसी ने यह दलील भी दी कि शुरुआती जांच को इस चरण पर रोकना जरूरी नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने CBI से पूछा- इतने गंभीर आरोप थे तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने CBI के रुख पर अहम सवाल उठाया. बेंच में शामिल जस्टिस जोयमाल्या बागची ने पूछा कि अगर आरोप इतने गंभीर थे तो CBI ने अब तक स्वतः संज्ञान लेकर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?
जस्टिस बागची ने कहा कि अगर CBI खुद कार्रवाई कर रही होती तो स्थिति अलग होती. उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के सामने फिलहाल इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है और बेंच को उस पर विचार करना है.
हाई कोर्ट की सुनवाई फिलहाल टली
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट में 20 अगस्त को प्रस्तावित सुनवाई पर फिलहाल रोक लग गई है. साथ ही CBI और अन्य जांच एजेंसियों को फिलहाल हाई कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश नहीं करने को कहा गया है.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर मामले के आरोपों की सत्यता को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अब आगे की सुनवाई में यह तय होगा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के CBI और ED जांच के आदेश को लेकर राहुल गांधी की चुनौती पर अदालत क्या रुख अपनाती है.

