आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम, 60 MTA विमानों का निर्माण देश में; स्वदेशीकरण पर फोकस

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना की परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षमता को अभूतपूर्व मजबूती देने के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक बड़े कदम को हरी झंडी दे दी है। करीब 1 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस विशाल परियोजना के तहत 60 बहुउद्देश्यीय परिवहन विमान (Multi-Role Transport Aircraft – MTA) खरीदने की टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य वायुसेना के पुराने परिवहन बेड़े को आधुनिक विमानों से बदलना है, ताकि दुर्गम सीमावर्ती इलाकों और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में सैनिकों, हथियारों व जरूरी सैन्य साजो-सामान की आवाजाही को और अधिक तीव्र एवं सुरक्षित बनाया जा सके। यह बेड़ा भारतीय वायुसेना की रणनीतिक 'एयरलिफ्ट' क्षमता में एक नई क्रांति लाने का काम करेगा।

'मेक इन इंडिया' पर केंद्रित है मेगा प्रोजेक्ट

इस परियोजना में स्वदेशी रक्षा उत्पादन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। प्रस्तावित नीति के अनुसार, करीब 20 प्रतिशत विमान 'फ्लाई-अवे' कंडीशन (पूरी तरह तैयार) में विदेशों से खरीदे जा सकते हैं, जबकि शेष 80 प्रतिशत विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इसके लिए भारतीय कंपनियों को विदेशी 'ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स' (OEM) के साथ साझेदारी करनी होगी। सरकार ने यह लक्ष्य रखा है कि भारत में बनने वाले इन विमानों में 60 प्रतिशत से अधिक सामग्री और कलपुर्जे स्वदेशी (Indigenized) होने चाहिए। इससे न केवल भारत के घरेलू एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को गति मिलेगी, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता और सप्लाई चेन भी और अधिक सुदृढ़ होगी।

टाटा, महिंद्रा और HAL के साथ विदेशी दिग्गज कंपनियों की भागीदारी

इस परियोजना में देश की प्रमुख रक्षा कंपनियों की भूमिका अहम मानी जा रही है। महिंद्रा डिफेंस ने ब्राजील की 'एम्ब्रेयर' (Embraer) के साथ हाथ मिलाया है और उसके 'C-390 मिलेनियम' परिवहन विमान को प्रमुख विकल्प के तौर पर रखा गया है। दूसरी ओर, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स ने लॉकहीड मार्टिन के साथ साझेदारी की है और वे 'C-130J सुपर हरक्यूलिस' विमान को पेश कर रहे हैं। गौरतलब है कि C-130J विमान पहले से ही भारतीय वायुसेना के बेड़े का हिस्सा है और विशेष अभियानों में अपनी दक्षता साबित कर चुका है। इसके अतिरिक्त, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) भी इस रक्षा परियोजना में एक प्रमुख भारतीय भागीदारी के रूप में अग्रणी भूमिका निभाएगी।

सिर्फ परिवहन नहीं, हवा में ईंधन भरने में भी सक्षम होंगे विमान

इन प्रस्तावित MTA विमानों की विशेषता केवल सैनिकों या सामान का परिवहन करना ही नहीं होगी, बल्कि इन्हें बहुउद्देश्यीय (Multi-Role) बनाने पर जोर दिया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर इन विमानों को 'एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग' (हवा में ही दूसरे विमानों में ईंधन भरने) वाले टैंकर के रूप में भी तैयार किया जा सकेगा। यह क्षमता भारतीय वायुसेना के लंबी दूरी के मिशनों को अंजाम देने और लड़ाकू विमानों की ऑपरेशनल रेंज को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी।

वायुसेना के आधुनिकीकरण की व्यापक रणनीति का हिस्सा

भारतीय वायुसेना अपने परिवहन और लड़ाकू विमानों के बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए एक व्यापक रणनीति पर काम कर रही है। 'C-295' परिवहन विमानों का निर्माण भारत में पहले ही शुरू हो चुका है, जो इस आधुनिकीकरण प्रक्रिया का एक बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा, राफेल लड़ाकू विमानों के बेड़े का विस्तार और उन्नत ट्रेनर एयरक्राफ्ट की खरीद भी इसी श्रृंखला की कड़ियां हैं।

60 नए MTA विमानों की खरीद इस पूरी रणनीतिक योजना का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। यह केवल पुराने विमानों को बदलने की कवायद नहीं है, बल्कि 'मेक इन इंडिया', विदेशी तकनीकी ट्रांसफर और रणनीतिक लॉजिस्टिक्स क्षमता को एक साथ आगे ले जाने का एक साहसिक प्रयास है। यह 1 लाख करोड़ रुपये की परियोजना भारतीय एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग के लिए भविष्य में नए रोजगार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बड़े द्वार खोलने वाली है।

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