देशभर के पाठ्यक्रम में शामिल होगी छत्तीसगढ़ की विरासत, ‘गंगाराम मगरमच्छ’ की कहानी भी पढ़ेंगे बच्चे

रायपुर| छत्तीसगढ़ अपनी अनूठी संस्कृति, कला और इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। अब देश भर के करोड़ों स्कूली बच्चे छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, महान साहित्यकारों और यहां की अनूठी लोक-कथाओं से रूबरू हो सकेंगे। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा तैयार की जा रही कक्षा 5वीं और 8वीं की नई किताबों (विशेषकर सामाजिक विज्ञान) में छत्तीसगढ़ राज्य से जुड़ी सामग्री को प्रमुखता से शामिल किया गया है।

पाठ्यक्रम में हुए प्रमुख बदलाव

  • मगरमच्छ 'गंगाराम' की अनूठी कहानी: बेमेतरा जिले के बावा मोहतरा गांव के चर्चित मगरमच्छ 'गंगाराम' की कहानी अब कक्षा 5वीं के बच्चे पढ़ेंगे। 100 साल से अधिक उम्र का यह मगरमच्छ गांव के तालाब में रहता था। इंसान और बेजुबान के बीच के आत्मीय रिश्ते की यह ऐसी मिसाल थी कि उसने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया।

  • ‘जो जीता वही बाजीराव’ अध्याय: इतिहास के पाठ्यक्रम में बदलाव करते हुए एक पाठ को ‘जो जीता वही बाजीराव’ के नाम से शामिल किया गया है। इसमें पेशवा बाजीराव के जीवन का उल्लेख है, जिन्होंने अपने 40 वर्ष के जीवनकाल में 40 युद्ध लड़े और सभी में विजय प्राप्त की।

  • बोज और राहत: शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए एनसीईआरटी ने एक राहत भरा कदम उठाते हुए सामाजिक विज्ञान के पाठों की संख्या कम कर दी है। पहले जहाँ 22 पाठ हुआ करते थे, उन्हें अब घटाकर केवल 12 पाठों में समेट दिया गया है।

इन महान साहित्यकारों को मिला प्रमुख स्थान

  • पंडित मुकुटधर पांडेय: छायावाद के जनक पंडित मुकुटधर पांडेय की जीवनी को कक्षा 8वीं के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।

  • पंडित माधवराव सप्रे: हिंदी पत्रकारिता के शलाका पुरुष पंडित माधवराव सप्रे का पाठ अब 6वीं की जगह 8वीं कक्षा के सिलेबस का हिस्सा बनाया गया है।

इसके साथ ही, पिछले कुछ वर्षों से किताबों में उपेक्षित रहे राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय भाषा और राष्ट्रीय चिह्नों से जुड़े अध्यायों को पुनः पूरी गरिमा के साथ प्रमुखता से जोड़ा गया है।

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