पेट की इन परेशानियों से बचना है तो संभलकर खाएं ये चीजें, बढ़ सकती है गैस और ब्लोटिंग

How to prevent bloating : हम जो कुछ भी खाते-पीते हैं, उसका सीधा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है। हालांकि, हर व्यक्ति का शरीर और मेटाबॉलिज्म अलग होता है, इसलिए एक ही खाद्य पदार्थ किसी के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है, तो वही चीज किसी दूसरे व्यक्ति में गैस, एसिडिटी या ब्लोटिंग जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है। भोजन की मात्रा, पकाने का सही तरीका और आंतों की सेहत इसमें बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आइए जानते हैं पेट से जुड़ी कुछ आम परेशानियों के दौरान किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

How to prevent bloating : ब्लोटिंग: ब्रोकली या खीरा?

ब्रोकली में प्रचुर मात्रा में फाइबर और कुछ खास कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जिन्हें आंतों के गुड बैक्टीरिया फर्मेंट करते हैं. संवेदनशील पेट वाले कुछ लोगों में इसके सेवन से गैस और पेट फूलने की दिक्कत बढ़ सकती है. इसके विपरीत, खीरा पानी से भरपूर होता है और शरीर को हाइड्रेट रखने में सहायक है. यदि आपको अक्सर ब्लोटिंग की समस्या रहती है, तो अपनी शारीरिक सहनशीलता के अनुसार खीरे को डाइट में शामिल कर सकते हैं.

 एसिडिटी: टमाटर या केला?

टमाटर की प्रकृति प्राकृतिक रूप से अम्लीय (एसिडिक) होती है। इसलिए जिन लोगों को एसिड रिफ्लक्स या सीने में जलन की शिकायत रहती है, उनके लिए टमाटर या उससे बनी चीजें लक्षणों को और बढ़ा सकती हैं। वहीं, पका हुआ केला पेट के लिए हल्का माना जाता है और एसिडिटी के दौरान कई लोगों को यह राहत पहुंचा सकता है, हालांकि हर शरीर की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।

कब्ज: कच्चा केला या पपीता?

कच्चे केले में रेजिस्टेंट स्टार्च अधिक होता है, जो कुछ मामलों में कब्ज की समस्या को और गंभीर बना सकता है। इसके मुकाबले, पपीते में भरपूर फाइबर और प्राकृतिक पाचक एंजाइम पाए जाते हैं। संतुलित मात्रा में पपीते का सेवन करने से आंतों की सफाई में मदद मिलती है और नियमित मल त्याग आसान हो जाता है।

 गैस: चना या अदरक?

चना बेशक अत्यधिक पौष्टिक और प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है, लेकिन इसमें मौजूद कुछ कार्बोहाइड्रेट्स आंतों के बैक्टीरिया द्वारा पचने के दौरान गैस उत्पन्न कर सकते हैं। दूसरी तरफ, अदरक का इस्तेमाल सदियों से पाचन क्रिया को बेहतर बनाने के लिए किया जाता रहा है, और यह गैस या पेट की ऐंठन को कम करने में असरदार साबित हो सकता है।

वॉटर रिटेंशन: नमक या लौकी?

भोजन में अत्यधिक मात्रा में नमक (सोडियम) का सेवन करने से शरीर पानी को रोककर रख सकता है, जिससे शरीर में सूजन या वॉटर रिटेंशन महसूस हो सकता है। इसके मुकाबले लौकी में पानी की मात्रा बहुत अधिक और सोडियम कम होता है, इसलिए संतुलित आहार के हिस्से के रूप में यह एक हल्का और बेहतरीन विकल्प माना जाता है।

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