भोपाल। मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी प्राइवेट हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी (10वीं-12वीं) स्कूलों के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। अब सभी मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों को इन नियमों का पालन करना जरूरी होगा।
ऑनलाइन होंगे काम और मान्यता के नियम
स्कूल खोलने, मान्यता लेने, उसका नवीनीकरण कराने, पढ़ाई का माध्यम या स्कूल का नाम-पता बदलने के लिए सिर्फ ऑनलाइन आवेदन ही स्वीकार किए जाएंगे। हर साल 30 सितंबर तक मिले आवेदनों को उसी साल के लिए माना जाएगा, इसके बाद मिलने वाले आवेदनों पर अगले साल विचार होगा। बिना नई मान्यता के कोई भी स्कूल अपनी नई ब्रांच चालू नहीं कर सकेगा।
पढ़ाई का माहौल और सुरक्षा निधि अनिवार्य
सभी प्राइवेट स्कूलों में अच्छी इमारत, योग्य टीचर, कंप्यूटर, लाइब्रेरी और प्रयोगशालाएं (लैब) होना जरूरी है। इसके साथ ही, बच्चों की संख्या के हिसाब से स्कूलों को सरकार के पास सुरक्षा निधि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) जमा करनी होगी। आवेदन करने के बाद अधिकारियों को 45 दिनों के भीतर फैसला लेना होगा।
फैसला लेने के लिए बनी समिति
निजी स्कूलों से जुड़े सभी फैसलों के लिए राज्य स्तर पर एक 'राज्य मान्यता समिति' बनाई जाएगी। इस कमेटी में स्कूल शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारी शामिल होंगे, जो मान्यता देने या रद्द करने का अंतिम फैसला लेंगे।
नियम तोड़ा तो जुर्माना और मान्यता रद्द
अगर कोई स्कूल नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसे पहले नोटिस देकर सुधार का मौका दिया जाएगा। जवाब सही न मिलने पर 1 से 2 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। बड़ी लापरवाही पर स्कूल की मान्यता भी रद्द की जा सकती है।
अगर किसी स्कूल की मान्यता रद्द होती है, तो वह 30 दिनों के भीतर लोक शिक्षण आयुक्त के पास अपनी बात रख सकता है। इसके बाद भी संतुष्ट न होने पर 5 हजार रुपये की फीस देकर राज्य मान्यता समिति में दोबारा अपील की जा सकती है।

