कोलकाता| देश की सबसे पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना का पहला चरण पश्चिम बंगाल राज्य में कुछ महीनों के विलंब के बाद आखिरकार शनिवार को आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता के साल्टलेक क्षेत्र स्थित सिंचाई विभाग के बंगले में सुबह आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में खुद ऑनलाइन 'सेल्फ एन्यूमरेशन' (स्व-गणना) फॉर्म भरकर राज्य में जनगणना प्रक्रिया-2027 का औपचारिक शुभारंभ किया।
इस आधुनिक जनगणना में देश के इतिहास में पहली बार भारत के नागरिकों को पूरी तरह से ऑनलाइन माध्यम से खुद और अपने पूरे परिवार का विवरण भरने यानी 'स्व-गणना' करने का एक अभूतपूर्व विकल्प प्रदान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने दी नागरिकों को पूर्ण गोपनीयता की गारंटी
इस महत्वपूर्ण अवसर पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने राज्य की जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि जनगणना के दौरान नागरिकों द्वारा दी जाने वाली प्रत्येक जानकारी पूरी तरह से गोपनीय रहेगी और देश के कानूनों के तहत पूरी तरह सुरक्षित रखी जाएगी। इन आंकड़ों का उपयोग केवल और केवल आधिकारिक सांख्यिकीय विश्लेषण, दूरदर्शी योजना निर्माण और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए ही किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक की व्यक्तिगत और निजी जानकारी का न तो कभी सार्वजनिक रूप से खुलासा किया जाएगा और न ही उसका किसी भी प्रकार का दुरुपयोग किया जा सकेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बार की यह जनगणना दो प्रमुख कारणों से बेहद ऐतिहासिक और खास है: पहली यह कि यह पूरी तरह से पेपरलेस और डिजिटल माध्यम से कराई जा रही है, और दूसरी यह कि देश में पहली बार आम नागरिकों को खुद ऑनलाइन माध्यम से सेल्फ एन्यूमरेशन करने की सुविधा दी गई है।
1 अगस्त से 15 अगस्त तक सेल्फ एन्यूमरेशन का करें उपयोग
मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे आने वाली 1 से 15 अगस्त के बीच इस डिजिटल सुविधा का अधिक से अधिक संख्या में उपयोग करें और सरकारी जनगणना कर्मियों को अपना पूरा सहयोग प्रदान करें।
मुख्यमंत्री ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस पूरी ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत नागरिकों को कुल 34 सवालों के जवाब देने होंगे। इन प्रश्नों में व्यक्ति की व्यक्तिगत पहचान, परिवार में सदस्यों की कुल संख्या, शिक्षा का स्तर, पेशा, आवास का प्रकार और अन्य तमाम सामाजिक-आर्थिक जानकारियां शामिल हैं। उन्होंने यह भी विशेष रूप से उल्लेख किया कि इस बार की जनगणना में पहली बार देश में जाति आधारित आंकड़े भी जुटाए जा रहे हैं, जिससे सरकार को पात्र जरूरतमंद लोगों तक जनकल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुँचाने और सटीक आंकड़े तैयार करने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी।
16 अगस्त से शुरू होगा घर-घर सत्यापन का कार्य
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि 15 अगस्त को ऑनलाइन सेल्फ एन्यूमरेशन की निर्धारित अवधि समाप्त होने के ठीक बाद 16 अगस्त से 15 सितंबर तक प्रशिक्षित जनगणना कर्मी घर-घर जाकर नागरिकों द्वारा ऑनलाइन भरी गई जानकारियों का भौतिक सत्यापन (Verification) करेंगे। यदि इस दौरान किसी स्तर पर कोई गलती पाई जाती है, तो नागरिकों को अपनी जानकारी में संशोधन करने का पूरा अवसर भी दिया जाएगा।
सरकारी गणना कर्मियों को इस कार्य के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया एक आधुनिक मोबाइल ऐप उपलब्ध कराया गया है, जिसके माध्यम से सभी आंकड़े सीधे केंद्रीय सर्वर पर सुरक्षित अपलोड हो जाएंगे। इससे पूरी प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक तेज, पारदर्शी और सटीक होने का दावा किया गया है, साथ ही पारंपरिक रूप से बड़े पैमाने पर होने वाले कागज के इस्तेमाल में भी भारी कमी आएगी।
एसआईआर सूची और अवैध घुसपैठियों के मुद्दे पर सख्त संदेश
वोटर लिस्ट के 'एसआइआर' (SIR) से जुड़े एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले को लेकर सरकार के पास पहले से ही बहुत स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के बाद लगभग 27 लाख नाम विचाराधीन श्रेणी में आए थे। इनमें से कुछ वैध नाम बहाल कर दिए गए हैं, जबकि लगभग सात लाख लोगों ने कानूनी न्यायाधिकरण (Tribunal) में अपील की है। हालांकि, लगभग 20 लाख ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें किसी भी प्रकार का कोई जवाब नहीं मिल सका है।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान अवैध घुसपैठियों और शरणार्थियों के बीच का अंतर बहुत कड़ाई से स्पष्ट करते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि देश में रह रहे अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कानून के अनुसार बेहद सख्त कार्रवाई की जाएगी और उन्हें उनके देश वापस खदेड़ा जाएगा। वहीं दूसरी ओर, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तय दायरे में आने वाले हिंदू, सिख, जैन और पारसी शरणार्थियों को देश के कानून के मुताबिक पूरा संरक्षण और सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही, उन्होंने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पिछली सरकार की प्रशासनिक अकी्रियता और कुप्रबंधन के कारण ही जनगणना की समय पर तैयारी पूरी नहीं हो सकी थी।

