नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित मिरांडा हाउस कॉलेज में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस और दिव्यांग श्रेणी की छात्राओं के लिए एक नई सौगात मिलने जा रही है। कॉलेज परिसर के भीतर 120 बेड की क्षमता वाले एक अत्याधुनिक और नए छात्रावास का निर्माण किया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य दूर-दराज से आने वाली उन जरूरतमंद छात्राओं को सुरक्षित, सुलभ और किफायती आवासीय सुविधा प्रदान करना है, जिन्हें दिल्ली जैसे महानगर में महंगे आवास खोजने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
परियोजना का उद्देश्य और छात्राओं को मिलने वाली बड़ी राहत
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाली छात्राओं के लिए रहने की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती रहा है। विशेषकर आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों की छात्राओं और दिव्यांग छात्राओं को किराए पर कमरे या अन्य हॉस्टल ढूंढने में आर्थिक और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर संघर्ष करना पड़ता है। इस नए छात्रावास के बन जाने से इन छात्राओं को कॉलेज परिसर के भीतर ही पूरी तरह सुरक्षित, अनुकूल और मुफ्त या रियायती दरों पर आवास की सुविधा मिल सकेगी, जिससे वे बिना किसी मानसिक तनाव के अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।
सीएसआर सहयोग और दो साल में निर्माण पूरा होने का लक्ष्य
कॉलेज अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व यानी सीएसआर फंड के वित्तीय सहयोग से पूरा किया जाएगा। इस योजना के तहत अगले दो हफ्तों के भीतर छात्रावास का प्रारंभिक डिजाइन और ब्लूप्रिंट तैयार होने की पूरी उम्मीद है, जिसके बाद विस्तृत कार्ययोजना पर मुहर लगाई जाएगी। प्रशासनिक अनुमान के मुताबिक सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इस पूरे निर्माण कार्य को जमीन पर उतारने और पूरा होने में लगभग दो साल का समय लगने की संभावना है।
एमसीडी और संबंधित विभागों की मंजूरियों का इंतजार
भले ही कॉलेज प्रशासन ने इस छात्रावास के निर्माण की रूपरेखा तैयार कर ली हो, लेकिन जमीन पर काम शुरू होने से पहले नगर निगम यानी एमसीडी और अन्य संबंधित वैधानिक विभागों से जरूरी अनापत्ति प्रमाण पत्र और स्वीकृतियां मिलना अभी बाकी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी आवश्यक प्रशासनिक मंजूरियां मिलते ही निर्माण कार्य को तीव्र गति से आगे बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही कॉलेज प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि निर्माण के दौरान पर्यावरण और छात्रों की कक्षाओं की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

