फर्जी रोमन थिएटर का 10 साल तक चलता रहा खेल, हजारों रुपये वसूलने के बाद ऐसे खुली पोल

नई दिल्ली। इटली से सामने आए एक हैरान कर देने वाले मामले में एक व्यक्ति ने नकली रोमन एम्फीथिएटर (खुला रंगमंच) बनाकर उसे प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर बताया और वर्षों तक पर्यटकों को गुमराह किया। पत्थरों जैसी दिखने वाली संरचनाएं, टूटी सीढ़ियां, मूर्तियां और कृत्रिम झील देखकर लोग इसे सदियों पुराना पुरातात्विक स्थल मानते रहे। हालांकि, पुरातात्विक विशेषज्ञों की गहन जांच के बाद इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हो गया।

फर्जी खोजकर्ता और गुमराह करने की कहानी

ब्रिटिश मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इटली के विचेंजा शहर के पास रहने वाले 69 वर्षीय फ्रेंको मालोसो ('वॉन रोजेनफ्रांज') ने दावा किया था कि उसने दुनिया के सबसे प्राचीन खुले रोमन एम्फीथिएटर की खोज की है। उसने पहाड़ी क्षेत्र में एक ऐसा सेट तैयार किया जो पहली नज़र में रोमन सभ्यता के अवशेषों जैसा दिखता था। वह पर्यटकों से लगभग 35 पाउंड (करीब 4,000 रुपये) प्रवेश शुल्क लेकर उन्हें यह दावा करते हुए घुमाता था कि यह स्थल 393 ईस्वी से भी पुराना है।

चर्चित नामों और भूस्खलन की आड़

पर्यटकों का विश्वास जीतने के लिए फ्रेंको ने कई ऐतिहासिक और काल्पनिक संदर्भ जोड़े। उसने दावा किया कि सम्राट जूलियस सीजर यहां आते थे और 'रोमियो एंड जूलियट' की नायिका जूलियट ने अपना बचपन यहीं बिताया था। उसने यह भ्रम भी फैलाया कि वर्ष 2005 में हुए एक भूस्खलन के बाद यह स्थल सामने आया था। अपनी बहुमुखी छवि और आत्मविश्वास के बल पर उसने स्थानीय प्रशासन ही नहीं, बल्कि यूरोपीय संघ की फंडिंग वाले एक टूरिज्म ऐप को भी झांसे में ले लिया।

जांच में फाइबरग्लास का खुलासा और अदालती सजा

वर्ष 2016 में पुलिस और पुरातत्व विशेषज्ञों द्वारा शुरू की गई जांच में पता चला कि पूरी संरचना फाइबरग्लास, पेपर माशे और आधुनिक निर्माण सामग्री से बनाई गई थी। पकड़े जाने के बाद भी आरोपी ने माफिया के हमले जैसी मनगढ़ंत कहानियां गढ़ने की कोशिश की। अंततः अदालत ने फ्रेंको मालोसो को अवैध निर्माण, धोखाधड़ी और नकली पुरातात्विक स्थल बनाने का दोषी पाते हुए दो साल चार महीने की जेल, 3,000 यूरो जुर्माना और सभी नकली ढांचों को हटाने का आदेश दिया।

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