अहमदाबाद विमान हादसा: सुप्रीम कोर्ट में AAIB की अपील -कॉकपिट ऑडियो को ना किया जाये सार्वजनिक…

Ahmedabad plane crash : अहमदाबाद में पिछले वर्ष हुए भीषण विमान हादसे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. इस कानूनी कार्यवाही के दौरान देश की प्रमुख जांच संस्था ‘एयरक्रॉफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो’ (एएआईबी) ने शीर्ष अदालत में अपना कड़ा रुख अख्तियार किया है. एएआईबी ने कोर्ट में दायर एक याचिका का पुरजोर विरोध किया है, जिसमें एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-171 के कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) की ऑडियो रिकॉर्डिंग को आम जनता के लिए सार्वजनिक करने और इस पूरे मामले की समानांतर (पैरेलल) न्यायिक जांच कराने की गुहार लगाई गई थी.

Ahmedabad plane crash : ‘संरक्षित सामग्री को उजागर करने का किसी को अधिकार नहीं’

केंद्रीय जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत अपने जवाबी हलफनामे में इस विरोध के पीछे के कानूनी कारणों को स्पष्ट किया है. ब्यूरो ने दलील दी है कि देश में विमान दुर्घटनाओं की जांच के लिए बने विशेष वैधानिक नियमों के तहत केवल और केवल एएआईबी को ही ऐसी आपदाओं की आधिकारिक जांच करने का संप्रभु अधिकार प्राप्त है. कानून के अनुसार, इस संवेदनशील जांच से जुड़ी बेहद गोपनीय और संरक्षित सामग्री को किसी भी बाहरी एजेंसी या आम जनता के सामने उजागर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

अक्टूबर 2026 तक सामने आएगी एआई-171 हादसे की अंतिम रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट को प्रगति रिपोर्ट सौंपते हुए एएआईबी ने भरोसा जताया है कि एयर इंडिया एआई-171 विमान दुर्घटना की चल रही व्यापक तकनीकी जांच को अक्टूबर 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा और इसकी अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंप दी जाएगी. ब्यूरो ने स्पष्ट किया कि यह पूरी वैज्ञानिक पड़ताल ‘एयरक्राफ्ट रूल्स 2025’ और ‘अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन’ (ICAO) के वैश्विक मानकों के अनुसार की जा रही है. इस जांच का मुख्य ध्येय किसी पर दोष मढ़ना नहीं, बल्कि तकनीकी खामियों का पता लगाकर भविष्य में ऐसी हवाई दुर्घटनाओं को रोकना और विमानन सुरक्षा को अभेद्य बनाना है.

गवाहों के बयान और एटीसी की बातचीत रहेगी गुप्त

जांच एजेंसी ने कोर्ट में ‘नियम 17’ के प्रावधानों का प्रमुखता से उल्लेख किया. हलफनामे के मुताबिक, जांच के दौरान दर्ज किए गए चश्मदीदों के बयान, विमान के क्रू सदस्यों की आपसी बातचीत, पायलटों की मेडिकल व निजी जानकारियां, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग, उसके लिखित दस्तावेज (ट्रांसक्रिप्ट), एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की ऑडियो रिकॉर्डिंग और जांच अधिकारियों की व्यक्तिगत राय जैसी अत्यंत संवेदनशील सामग्रियों को कभी भी सार्वजनिक नहीं किया जा सकता.

कानूनन, ऐसी गोपनीय जानकारियों को केवल एक ही शर्त पर बाहर लाया जा सकता है जब केंद्र सरकार खुद यह तय करे कि इस प्रकटीकरण से भविष्य की जांचों पर पड़ने वाले नकारात्मक असर की तुलना में जनहित (पब्लिक इंटरेस्ट) का महत्व कहीं अधिक है. मौजूदा मामले में सरकार ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है. एएआईबी ने सख्त लहजे में कहा कि नियम 17(5) के तहत कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक करने पर पूर्ण वैधानिक प्रतिबंध लागू है.

गवाहों की सुरक्षा और जांच की निष्पक्षता के लिए गोपनीयता अनिवार्य

हलफनामे में आगे तर्क दिया गया कि विमान हादसों की अंतरराष्ट्रीय जांच ‘नो-ब्लेम’ (बिना किसी पर आरोप लगाए सुरक्षा सुधार) के सिद्धांत पर काम करती है. यदि गवाहों, पायलटों या तकनीकी विशेषज्ञों को यह डर रहेगा कि उनके द्वारा दिए गए बयान भविष्य में सार्वजनिक कर दिए जाएंगे या उनके खिलाफ कानूनी हथियार के रूप में इस्तेमाल होंगे, तो वे जांच टीम के साथ खुलकर और बिना किसी दबाव के सहयोग करने से कतराएंगे. इससे सुरक्षा जांच का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा. इसके अलावा, एएआईबी ने कहा कि विमान दुर्घटनाओं की जांच से संबंधित हमारा घरेलू कानूनी ढांचा अपने आप में पूर्ण है, इसलिए अदालत द्वारा किसी समानांतर या बाहरी समिति से जांच कराने की कोई गुंजाइश नहीं बचती. इसी आधार पर याचिका को तुरंत खारिज करने की मांग की गई है.

डीजीसीए की भूमिका पर सवाल

गौरतलब है कि यह पूरी कानूनी लड़ाई ‘सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन’ नामक संस्था द्वारा दायर एक जनहित याचिका के बाद शुरू हुई है. याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि इतनी बड़ी त्रासदी की जांच अदालत की सीधी निगरानी में एक स्वतंत्र समिति द्वारा की जानी चाहिए. उन्होंने एएआईबी की वर्तमान जांच समिति के गठन पर उंगली उठाते हुए कहा कि इस टीम में कई ऐसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं जो ‘नागरिक उड्डयन महानिदेशालय’ (DGCA) से जुड़े हैं. याचिकाकर्ता की दलील है कि इस भीषण हादसे में खुद डीजीसीए की विनियामक (रेगुलेटरी) भूमिका भी जांच के दायरे में आती है, ऐसे में उनके अधिकारियों की मौजूदगी से निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है.

विमान हादसे की दर्दनाक पृष्ठभूमि

इस पूरे कानूनी विवाद की जड़ में 12 जून 2025 को हुआ वह काला दिन है, जब एयर इंडिया की अंतरराष्ट्रीय उड़ान AI-171 एक भयानक हादसे का शिकार हो गई थी। यह यात्री विमान अहमदाबाद के हवाई अड्डे से लंदन गैटविक के लिए उड़ान भर रहा था. टेक-ऑफ करने के महज कुछ ही मिनटों बाद विमान के इंजनों में खराबी आ गई और वह अनियंत्रित होकर अहमदाबाद के व्यस्त रिहायशी इलाके मेघानीनगर में स्थित एक मेडिकल हॉस्टल कॉम्प्लेक्स की बहुमंजिला इमारत से जा टकराया. इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे में विमान में सवार यात्रियों, चालक दल के सदस्यों और जमीन पर मौजूद स्थानीय नागरिकों सहित कुल 260 मासूम लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. इसे भारतीय विमानन इतिहास की सबसे भीषण और दर्दनाक दुर्घटनाओं में से एक माना जाता है.

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