बिहार में गंभीर मरीजों को बड़ी राहत, AIIMS-IGIMS और मेदांता मिलकर करेंगे सर्जरी

पटना। बिहार के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों और प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को अपनी लंबित सर्जरियों (पेंडिंग ऑपरेशनों) का पूरा और अद्यतन ब्योरा आगामी शुक्रवार तक हर हाल में स्वास्थ्य विभाग को सौंपना होगा। स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने बुधवार को राज्य के बड़े चिकित्सा संस्थानों के प्राचार्यों, अधीक्षकों और निदेशकों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें यह कड़ा निर्देश जारी किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था को दुरुस्त करना और मरीजों को बिना किसी देरी के गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है। सरकार ने पेंडिंग पड़े ऑपरेशनों को जल्द से जल्द निपटाने के लिए एक विशेष रणनीति तैयार की है, जिसके तहत डेटा मिलते ही त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

लंबित ऑपरेशनों को पूरा करने के लिए विशेष अभियान

राज्य सरकार ने अस्पतालों में लंबे समय से लंबित पड़े ऑपरेशनों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के लिए एक विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इसी अभियान की रूपरेखा तैयार करने के लिए सभी चिकित्सा संस्थानों से ऑपरेशन से जुड़ी विस्तृत और सटीक जानकारी मांगी गई है। स्वास्थ्य विभाग इन प्राप्त आंकड़ों का गहन विश्लेषण करेगा और उसी के आधार पर एक व्यापक कार्ययोजना बनाई जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य मरीजों को ऑपरेशन के लिए मिलने वाली लंबी तारीखों और अनावश्यक इंतजार से राहत दिलाना है, ताकि उन्हें समय पर सही इलाज मिल सके।

बड़े संस्थानों के समन्वय से होगी जटिल सर्जरी

समीक्षा बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि यदि जिला स्तर के मेडिकल कॉलेजों या अस्पतालों में बुनियादी ढांचे या विशेषज्ञों की कमी के कारण सर्जरियां रुकी हुई हैं, तो उन्हें बड़े संस्थानों में रेफर किया जाए। इसके लिए इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस), एम्स और मेदांता जैसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों की सेवाएं ली जाएंगी। इन उच्च स्तरीय संस्थानों के साथ बेहतर तालमेल और समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि गंभीर और जटिल बीमारियों से पीड़ित मरीजों के ऑपरेशन में कोई बाधा न आए और उन्हें उच्च श्रेणी की स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और सुविधाओं का विस्तार

मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के संकल्प को दोहराते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्रमुख अस्पतालों को अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों और नई मशीनों से लैस करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। बैठक में राज्य भर के चिकित्सा बुनियादी ढांचे और सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं के विस्तार पर भी विस्तार से चर्चा की गई। सरकार का प्रयास है कि सरकारी क्षेत्र में ही मरीजों को हर प्रकार की आधुनिक जांच और ऑपरेशन की सुविधा मिल जाए, जिससे उन्हें निजी अस्पतालों के चक्कर न काटने पड़ें और डॉक्टरों को भी इलाज करने में आसानी हो।

आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मुफ्त इलाज का संबल

सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के किसी भी नागरिक का इलाज पैसों की कमी के कारण न रुके। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष और आयुष्मान भारत योजना का अधिकतम लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने का निर्देश दिया है। इन योजनाओं के प्रभावी उपयोग से आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब मरीजों को महंगी से महंगी सर्जरी पूरी तरह मुफ्त या बेहद किफायती दरों पर मिल सकेगी। सरकार अस्पतालों के बीच एक ऐसी पारदर्शी प्रणाली विकसित कर रही है जिससे जरूरतमंद मरीजों को वित्तीय सहायता मिलने में कोई कागजी देरी न हो।

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