Samay Raina Supreme Court नई दिल्ली : दिव्यांग व्यक्तियों पर कथित असंवेदनशील टिप्पणियों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्टैंडअप कॉमेडियन और यूट्यूबर समय रैना समेत पांच लोगों पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. सर्वोच्च अदालत ने अपने पूर्व आदेश का पालन नहीं करने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समाज की भावनाओं का सम्मान नहीं किया जाएगा और अदालत के निर्देशों की अनदेखी जारी रही, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि समय रैना ने अदालत के आदेश को गंभीरता से नहीं लिया. अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि आदेश का पालन किए बिना हलफनामा दाखिल करना मामले की गंभीरता को और बढ़ाता है.
Samay Raina Supreme Court:दो सप्ताह में जुर्माना जमा करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि समय रैना सहित सभी पांचों लोगों को दो सप्ताह के भीतर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना जमा करना होगा. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में उसके आदेशों का पालन नहीं किया गया तो जुर्माने की राशि बढ़ाकर 30 लाख रुपये तक की जा सकती है.
सुनवाई के दौरान अदालत ने शुरुआत में प्रत्येक पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की बात कही थी. हालांकि, कॉमेडियन की ओर से पेश वकीलों ने नरमी बरतने की अपील की, जिसके बाद अदालत ने जुर्माने की राशि घटाकर 3 लाख रुपये कर दी.
कोर्ट ने लगाई फटकार
सुनवाई के दौरान पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह स्पष्ट दिखाई देता है कि समय रैना ने अदालत को हल्के में लिया. अदालत ने कहा कि आदेश का खुलेआम उल्लंघन किया गया और उसका पालन किए बिना हलफनामा दाखिल कर दिया गया.
पीठ ने कहा,
“अगर आप अपने तौर-तरीके सुधारना नहीं चाहते और समाज की भावनाओं का सम्मान करना नहीं चाहते, तो आपको परिणाम भुगतने होंगे।”
अदालत की इस टिप्पणी को आदेशों की अवमानना के प्रति कड़ा संदेश माना जा रहा है.
क्या है पूरा मामला ?
यह मामला क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है. संस्था ने आरोप लगाया था कि समय रैना और अन्य कॉमेडियनों ने अपने कार्यक्रमों में दिव्यांग व्यक्तियों का मजाक उड़ाया और स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) जैसी गंभीर बीमारी के महंगे इलाज को लेकर असंवेदनशील टिप्पणियां कीं.
याचिका में कहा गया था कि इस प्रकार की टिप्पणियां न केवल दिव्यांग व्यक्तियों की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि समाज में उनके प्रति गलत संदेश भी देती हैं.
इस मामले में समय रैना के अलावा विपुल गोयल, बलराज घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर भी अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश हुए थे और उन्होंने अपने व्यवहार पर खेद व्यक्त किया था.
क्या था सुप्रीम कोर्ट का पुराना आदेश?
27 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य कॉमेडियनों को निर्देश दिया था कि वे अपने मंचों पर ऐसे दिव्यांग व्यक्तियों को आमंत्रित करें जिन्होंने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है.
अदालत का उद्देश्य समाज में सकारात्मक संदेश देना और दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति सम्मान की भावना बढ़ाना था. साथ ही कोर्ट ने कहा था कि ऐसे विशेष कार्यक्रमों से प्राप्त आय का उपयोग दिव्यांग व्यक्तियों के उपचार और सहायता के लिए किया जाए.
हालांकि, याचिकाकर्ता संस्था ने अदालत को बताया कि इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया. इसी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए जुर्माना लगाने का आदेश दिया.
अदालत का स्पष्ट संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश के जरिए यह स्पष्ट कर दिया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है. अदालत ने कहा कि सार्वजनिक मंचों पर ऐसी टिप्पणियां स्वीकार्य नहीं हैं जो दिव्यांग व्यक्तियों की गरिमा को ठेस पहुंचाएं. साथ ही न्यायालय के आदेशों की अवहेलना किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

