दिल्ली : खइके पान बनारस वाला खुल जाये बंद अकल का ताला… बनारसी पान और बनारसी आम इनके शौकीनों के लिए खुशखबरी है. जिस बनारस के रसीले पान को खाकर फिल्म डॉन में अमिताभ बच्चन ने धमाल मचा दिया था, उस बनारसी पान को GI टैग मिला है यानी ज्योग्रिफिकल इंडेक्स में जगह मिली है. जो बनारसी पान और लंगड़ा आम अपने रसीलेपन और उम्दा स्वाद के लिए देश विदेश में मशहूर है उसे अब विश्व स्तर पर नई पहचान मिली है. बनारसी पान और लंगड़ा आम को GI टैग (यानी ज्योग्रिफिकल इंडेक्स) में स्थान मिला है. मतलब GI इंडेक्स में स्थान मिलने के बाद पान और आम बनारस के ही नाम से जाना जायेगा.
बनारस के दो उत्पाद को GI इंडेक्स में मिली जगह
केवल पान ही नहीं बनारस के लंगड़ा आम को और उत्तर प्रदेश के कुछ और उत्पादों को GI इंडेक्स में जगह मिली है. बनारस के पान और बनारस के आम के साथ-साथ रामनगर के भंटा बैगन और चंदौली के आदमचीन चावल को भी GI इंडेक्स में जगह मिली है. खास बात ये है कि चारों उत्पाद किसानों से जुड़े हैं. GI इंडेक्स में शामिल होने के बाद इन उत्पादों को उगाने वाले किसानों को एक खास पहचान भी मिलेगी.
आइये सबसे पहले आपको बताते है कि GI इंडेक्स होता क्या है.
GI यानी जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग एक प्रकार का लेवल होता है जिसमें किसी उत्पाद को एक खास भौगोलिक पहचान दी जाती है. 1999 में रजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन एक्ट के तहत ज्योग्राफिकल इंडिकेशन ऑफ गुड्स लागू किया गया था. जिसके तहत किसी खास उत्पाद के उत्पादन का कानूनी अधिकार उस खास भौगोलिक क्षेत्र को दे दिया जाता है. देश और दुनिया में जब उसकी ख्याती फैलती है तब उसे प्रमाणित करने के लिए एक प्रक्रिया होती है, जिसे GI यानी ज्योग्रेफिकल इंडिकेटर कहते हैं.
GI टैगिंग के क्या हैं फायदे?
GI टैग मिलने से किसानों को उसके उत्पादन के लिए खास मदद मिलती है. इस बार उत्तर प्रदेश के कुल सात उत्पादों को GI टैग मिला है. ODOP के सात उत्पाद, अलीगढ़ का ताला,हाथरस का हींग,नगीना का वुड कटिंग,मुजफ्फरनगर का गुड़,बखीरा का ब्रासवेयर,बांदा का सज़र पत्थर क्राफ्ट और प्रतापगढ़ के आंवले को GI टैग मिला है.
नाबार्ड के मुताबिक जिन उत्पादों को GI टैग मिला है उनके उत्पादन और मार्केटिंग के लिए वित्तीय संस्थाएं सामने आयेंगी.
करीब 25 हजारो करोड़ और 20 लाख लोगों से जुड़ा है कारोबार
उत्तर प्रदेश में जिन उत्पादों को GI टैग मिला है, उनसे करीब 25 हजार करोड़ का सालाना कारोबार है और करीब 20 लाख लोग इसके कारोबार से जुड़े हैं.
आपको बता दें कि बनारस के पान और बनारसी लंगड़ा आम के अलावा उत्तर प्रदेश के कुछ और उत्पाद हैं जो GI टैगिंग की लाइन में लगे हैं. जैसे बनारसी ठंढई,बनारस का लाल पेड़ा,तिरंगी बर्फी, बनारस का भरवां लाल मिर्च और चिरई गांव के करोंदे को GI टैगिंग का इंतजार है.
जिन उत्पादों को GI टैगिंग मिली है, उनसे जुड़े ज्यादातर उत्पाद किसानों और छोटे कारोबारियों से जुड़े हैं. जाहिर है GI टैगिंग के बाद इन चीजों के उत्पादन और मार्केटिंग के लिए कंपनियां आगे आयेंगी और ऐसा हुआ तो इसमें कोई शक नहीं है कि इनके भी अच्छे दिन आयेंगे.

