सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड स्थित खूंशी क्षेत्र में मानसून की बेरुखी से परेशान ग्रामीणों ने बारिश की कामना के लिए एक अनूठी परंपरा का पालन किया है। इंद्रदेव को प्रसन्न करने के उद्देश्य से गांव वालों ने पूरे हर्षोल्लास के साथ मेढ़क-मेढ़की का विवाह रचाया, जिसमें निमंत्रण पत्र बांटने से लेकर बैंड-बाजे और दावत तक की सभी रस्में निभाई गईं।
आस्था और परंपरा का अनूठा संगम
गांव के बुजुर्ग और आयोजन समिति के सदस्य रामनाथ सिंह का कहना है कि जब भी क्षेत्र में सूखे जैसे हालात बनते हैं, तो मेढ़क-मेढ़की का विवाह कराने की परंपरा निभाई जाती है। ग्रामीणों की अटूट आस्था है कि इस अनुष्ठान से इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और अच्छी बारिश होती है। यह आयोजन न केवल बारिश की कामना का जरिया है, बल्कि यह ग्रामीणों की आपसी एकता और संस्कृति के प्रति उनके समर्पण का भी प्रतीक है।
वैदिक मंत्रोच्चार और उत्सव का माहौल
इस अनोखे विवाह समारोह में खूंशी सहित आसपास के दर्जनों गांवों के लोग बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए। विवाह की तैयारियों में कोई कमी नहीं रखी गई थी; ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजे की धुन पर बारात निकाली गई, जिसमें युवा और बुजुर्ग सभी थिरकते नजर आए। पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मेढ़क-मेढ़की का विवाह संपन्न कराया गया। विवाह के बाद पूरे क्षेत्र में सामूहिक भोज का आयोजन किया गया और लोगों में प्रसाद वितरित किया गया।
बारिश के लिए आसमान पर टिकी निगाहें
इस आयोजन के बाद पूरे सूरजपुर क्षेत्र के किसानों को अब अच्छी बारिश की प्रबल उम्मीद है। ग्रामीणों का मानना है कि पूर्वजों के समय से चली आ रही इस परंपरा का पालन करने से जल्द ही खेतों में पानी लबालब भर जाएगा। फिलहाल, क्षेत्र के लोगों की नजरें आसमान की ओर टिकी हैं और वे जल्द से जल्द वर्षा होने की सामूहिक प्रार्थना कर रहे हैं।

