Tuesday, July 7, 2026
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महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर मोटापे का असर, इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

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मां बनना हर महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत और सुखद अहसास होता है। लेकिन गर्भधारण (कंसीव) करने से पहले अगर कुछ जरूरी बातों और सावधानियों का ध्यान रखा जाए, तो होने वाली मां और शिशु दोनों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है। डॉक्टरों के अनुसार, गर्भधारण करने से पूर्व महिला का शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट रहना बेहद आवश्यक है। इस दौरान सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है आपका वजन। यदि आप फैमिली प्लानिंग कर रही हैं, तो सबसे पहले अपने बढ़ते वजन को संतुलित करें। प्रेग्नेंसी से पहले अत्यधिक वजन या मोटापा होने से गर्भावस्था के नौ महीनों के दौरान कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। वजन में थोड़ी सी कमी लाकर आप इन संभावित खतरों को काफी हद तक टाल सकती हैं।

मोटापे के कारण बढ़ जाता है इन गंभीर खतरों का रिस्क

विभिन्न चिकित्सा शोधों और अध्ययनों में यह साफ हो चुका है कि महिलाओं में अत्यधिक मोटापा गर्भपात (मिसकैरेज) की वजह बन सकता है। इसके अलावा, अधिक वजन के कारण गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास में रुकावट आ सकती है, उसमें जन्मजात कमियां हो सकती हैं या फिर डिलीवरी के समय गंभीर जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।

प्रजनन क्षमता (फर्टिलिटी) पर पड़ता है सीधा असर

ज्यादा वजन होने का सीधा असर महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर पड़ता है। मोटापे के कारण शरीर में हार्मोनल असंतुलन हो जाता है, जिससे फर्टिलिटी लेवल घटने लगता है। यही वजह है कि कई महिलाओं को शुरुआत में गर्भधारण करने में ही काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और कंसीव करने में लंबा समय लग जाता है।

मां और बच्चे दोनों को हो सकती हैं ये बीमारियां

गर्भावस्था के दौरान मोटापे की वजह से महिलाओं में हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) और जेस्टेशनल डायबिटीज (गर्भावस्था के दौरान होने वाली शुगर) का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। इन सामान्य समस्याओं के अलावा, इसका असर नवजात पर भी पड़ता है। यदि मां का वजन बहुत ज्यादा है, तो बच्चे को जन्म से ही डायबिटीज की शिकायत होने की संभावना रहती है, साथ ही उसे अन्य शारीरिक और मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा भी बना रहता है।

खानपान को लेकर न बरतें लापरवाही

यदि आपका वजन बिल्कुल सामान्य है या सामान्य से थोड़ा ही ज्यादा है, तो आपको बहुत अधिक घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप सेहत को लेकर लापरवाह हो जाएं और डाइट का ध्यान न रखें। इस नाजुक समय में आपके शरीर को सामान्य से कहीं ज्यादा पोषण और अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है। इसलिए गर्भधारण करने से पहले, पूरी प्रेग्नेंसी के दौरान और डिलीवरी के बाद भी अपने खानपान पर विशेष ध्यान दें और वजन को संतुलित बनाए रखें।