पानी की बूंद-बूंद को तरसे लोग, कृष्णापुरी में रातभर जागकर करते हैं इंतजार

पूर्वी दिल्ली: मंडावली इलाके के कृष्णापुरी में पिछले दो महीनों से पानी की भारी किल्लत ने स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। क्षेत्र में पानी का संकट इस कदर विकराल रूप ले चुका है कि कई परिवारों के नलों में पिछले एक महीने से पानी की एक बूंद तक नहीं टपकी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के आला अधिकारी बार-बार शिकायत किए जाने के बाद भी केवल कागजी खानापूर्ति और मौका मुआयना करके लौट जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर समस्या का कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा है।

नींद चैन सब उड़ा, रात 2 बजे से जागकर पानी का इंतजार कर रहे लोग

कृष्णापुरी की गली नंबर दो (बंद गली) के रहने वाले परिवारों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि यहाँ मार्च महीने से ही पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप पड़ी है। अगर कभी कभार नलों में थोड़ा-बहुत पानी आता भी है, तो वह इतना गंदा और बदबूदार होता है कि पीने के काम में बिल्कुल नहीं लाया जा सकता। पानी की इस किल्लत ने पिछले तीन महीनों से लोगों की पूरी दिनचर्या को तहस-नहस कर दिया है। घर के किसी न केवल एक सदस्य को रोजाना रात के दो बजे से उठकर नलों के पास बैठना पड़ता है, ताकि अगर कुछ मिनटों के लिए भी पानी आए तो दैनिक जरूरतों के लिए उसे डिब्बों और बाल्टियों में स्टोर किया जा सके।

जेब पर पड़ रहा भारी बोझ, रोज खरीदना पड़ रहा बोतलबंद पानी

सरकारी सप्लाई बंद होने के कारण अब यहाँ के वाशिंदों को पीने और खाना बनाने के पानी के लिए पूरी तरह से प्राइवेट सप्लायर्स पर निर्भर होना पड़ रहा है। लोगों को हर रोज अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा बाजार से बोतलबंद पानी (वाटर कैन) खरीदने में खर्च करना पड़ रहा है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। जनता का कहना है कि एक तरफ तो उन्हें पानी का बिल थमाया जा रहा है और दूसरी तरफ पानी के लिए अलग से रोज पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।

जल बोर्ड की लापरवाही से खोदे गए गड्ढे बन रहे हादसों का सबब

स्थानीय निवासियों में दिल्ली जल बोर्ड के रवैये को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों ने बताया कि समस्या को लेकर कई बार जल बोर्ड के दफ्तर में लिखित शिकायतें दी गईं। विभाग के कर्मचारी फॉल्ट ढूंढने के नाम पर गलियों में बड़े-बड़े गड्ढे खोदकर चले गए, जिन्हें बाद में ठीक से भरा नहीं गया। अब ये खुले और आधे-अधूरे खोदे गए गड्ढे राहगीरों और खासकर छोटे बच्चों व बुजुर्गों के लिए आए दिन हादसों की वजह बन रहे हैं।

अधिकारियों का केवल निरीक्षण दौरा, कार्रवाई सिफर

क्षेत्रीय जनता का साफ तौर पर कहना है कि जब भी पानी को लेकर विरोध प्रदर्शन या लिखित शिकायत की जाती है, तो विभाग के अधिकारी केवल औपचारिक तौर पर निरीक्षण (इंस्पेक्शन) करने के लिए गली में आते हैं। वे जल्द ही पाइपलाइन ठीक करने का आश्वासन तो देते हैं, लेकिन उनके जाते ही मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है। निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पानी की सुचारू आपूर्ति शुरू नहीं की गई और इन गड्ढों को नहीं भरा गया, तो वे जल बोर्ड कार्यालय का घेराव करने को मजबूर होंगे।

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