श्रीराम जन्मभूमि दान प्रकरण में पहली FIR,8 नामजद समेत कई आरोपी जांच के घेरे में

Ram Mandir Donation Scam:लखनऊ/अयोध्या : उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के दान (भेंट/चढ़ावा) प्रकरण में बड़ा कदम उठाते हुए पहली एफआईआर दर्ज करा दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि थाने में 8 नामजद और अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है.

Ram Mandir Donation Scam:SIT की रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई FIR

सरकार के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर गठित एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर शासन को रिपोर्ट सौंपी थी. रिपोर्ट में कथित अनियमितताओं को लेकर कठोर संस्तुतियां की गईं, जिसके बाद गुरुवार को एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई की गई.

ट्रस्ट सदस्य की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला

यह एफआईआर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत के आधार पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में दर्ज की गई. मामला अपराध संख्या 90/2026 के रूप में पंजीकृत हुआ है.

एफआईआर में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और श्रीराम शंकर यादव उर्फ टिन्नू को नामजद किया गया है. इसके अलावा अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है.

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61, 3(5) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की धारा 13(1)(a) के तहत मामला दर्ज किया है.

आयुक्त विजय विश्वास पंत की अगुवाई में हुई जांच

इस मामले की जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख सदस्य और लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने मंगलवार को अपनी टीम के अन्य सदस्यों के साथ शासन को प्रारंभिक प्रतिवेदन सौंपा था. बताया जा रहा है कि रिपोर्ट में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की गई थी. इसी के आधार पर एफआईआर दर्ज करने का निर्णय लिया गया.

दान में कथित चोरी के आरोप के बाद बनी थी SIT

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए भेंट और चढ़ावे में कथित गड़बड़ी एवं चोरी के आरोप सामने आने के बाद ट्रस्ट ने विशेष जांच की मांग की थी. इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया गया.

मुख्यमंत्री ने पहले ही स्पष्ट किया था कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और “दूध का दूध और पानी का पानी” किया जाएगा. उन्होंने कहा था कि यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.

पूछताछ जारी, आगे हो सकती है बड़ी कार्रवाई

एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियों ने आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है. प्रारंभिक जांच के आधार पर आगे और लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है.

 हलांकि इस FIR की खास बता ये रही कि इस म पूरे प्रकरण में कहीं भी मंदिर प्रबंधन समिति से जुड़े किसी बड़े और प्रभावशाली लोगों के नाम नहीं आये हैं.

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