Friday, June 26, 2026
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श्री राम मंदिर के हिडन कैमरे में कैद हुए चोरी के राज,दानपेटी से बैंक तक ऐसे होता था खेल…

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Ram Mandir Hidden camera 
Ram Mandir Hidden camera 

Ram Mandir Hidden camera अयोध्या : श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में कथित चोरी और गबन के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं. जांच एजेंसियों को शुरुआती जांच, हिडन कैमरों की फुटेज और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि दानपेटियों से नकदी और आभूषण निकालने से लेकर बैंक में राशि जमा कराने तक की प्रक्रिया में  सुनियोजित तरीके से हेराफेरी की जाती थी.

मामले में अब तक 8 लोगों के खिलाफ  नामजद FIR दर्ज किया गया है, जबकि मंदिर समिति और प्रबंधन से जुड़े पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी पड़ताल एजेंसियां कर रही हैं.

Ram Mandir Hidden camera : CCTV  कैमरे नहीं हिडन कैमरे से मिल रहे है सबूत

मंदिर के दान के पैसों की चोरी की खबरे बाहर आने के बाद जांच एजेंसियां लगातार सीसीटीवी फिटेज खंगाल रही है लेकिन सीसीटीवी से कोई खास सहायता नहीं मिली. ज्यादातर सीसीटीवी फुटेज डिलीट किया जा चुके हैं. जिसमें सबूत होने की संभावना थी, लेकिन जांच एजेंसियों ने राहत की सांस तब ली है जब उन्हें मंदिर में ही मौजूद हिडन कैमरों से वीडियोज मिले हैं. हिडन कैमरों से मिले वीडियोज से कई जगहों पर ये देखा जा रहा है कि कैसे चंदा गिनती में लगे कुछ लोग वहां से आभूषण और कैश की  हेराफेरी कर रहे थे.

ऐसे पैदा हुआ चोरी का शक

सूत्रों के अनुसार, मई महीने के अंतिम सप्ताह में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों ने बैंक में जमा हो रही दानराशि और दानपेटियों से निकलने वाली रकम का मिलान किया. इसी दौरान उन्हें संदेह हुआ कि एक दानपेटी से सामान्यतः 7 से 8 लाख रुपये निकलते थे, लेकिन लगातार कुछ दिनों तक 500 रुपये की गड्डियों में कमी दिखाई देने लगी.

शक गहराने पर नोटों की गिनती वाले कक्ष में गुप्त (हिडन) कैमरे लगाए गए, जिनकी एक सप्ताह की रिकॉर्डिंग देखने के बाद कथित चोरी का तरीका सामने आया.

हिडन कैमरे में कैद हुआ पूरा खेल

जांच में सामने आया कि नोटों की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारी जानबूझकर सीसीटीवी कैमरे के सामने खड़े हो जाते थे, जबकि उनके अन्य साथी पीछे नोटों की गड्डियों से नकदी निकालकर अपने कपड़ों में छिपा लेते थे. सामान्य कैमरों में यह गतिविधि नजर नहीं आती थी, लेकिन हिडन कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई.

जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी फुटेज के आधार पर कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं.

बैंक में जमा करने से पहले हटाए जाते थे अतिरिक्त नोट

जांच में कथित तौर पर एक और तरीका सामने आया है. आरोप है कि कर्मचारी नोटों की गड्डी तैयार करते समय उसमें अतिरिक्त नोट लगा देते थे. बैंक में जब गड्डियों की गिनती होती थी तो हर नोट अलग-अलग गिनने के बजाय केवल गड्डियों की संख्या के आधार पर वाउचर तैयार हो जाता था.

इसके बाद बैंक में राशि जमा कराने के दौरान गड्डियों में लगाए गए अतिरिक्त नोट निकाल लिए जाते थे. इस तरह बैंक के रिकॉर्ड और वाउचर में कोई अंतर नहीं दिखता था, जबकि नकदी की कथित चोरी भी हो जाती थी.

वाउचर तैयार करने की प्रक्रिया भी जांच के घेरे में

जांच के दौरान सामने आया कि वाउचर तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े अनुकल्प मिश्रा पर भी गंभीर आरोप लगे हैं. जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित हेराफेरी में उसका बहनोई लव कुश मिश्रा भी शामिल था.

मामला सामने आने के बाद पुलिस ने लव कुश मिश्रा के घर से लगभग 10 लाख रुपये बरामद किए थे. पुलिस इस बरामद राशि के स्रोत की भी जांच कर रही है.

सिफारिश के आधार पर लगी थी कर्मचारियों की तैनाती

जांच में यह भी सामने आया है कि नोट गिनने की प्रक्रिया में शामिल कई कर्मचारी किसी न किसी परिचित या सिफारिश के आधार पर नियुक्त किए गए थे.

जांच के अनुसार, व्यवस्थापक राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव ने अपने चचेरे भाई मनीष यादव को इस कार्य में लगाया था. वहीं लंबे समय से कार्यरत अनुकल्प मिश्रा ने अपने बहनोई लव कुश मिश्रा को इस प्रक्रिया से जोड़ दिया था. जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि नियुक्तियों में नियमों का पालन किया गया था या नहीं.

तलाशी नहीं होने का उठाया गया कथित फायदा

जांच अधिकारियों के अनुसार, ड्यूटी समाप्त होने के बाद कर्मचारियों की नियमित तलाशी नहीं ली जाती थी. इसी लापरवाही का कथित तौर पर फायदा उठाकर दानपेटी खोलने और नोटों की गिनती वाले कक्ष से ही नकदी और अन्य सामान बाहर ले जाया जाता रहा.

जांच में यह भी सामने आया है कि चोरी पहले की जाती थी और उसके बाद नोटों तथा आभूषणों का रिकॉर्ड तैयार किया जाता था.

जेवरात भी बनाए जाते थे निशाना

जांच एजेंसियों के अनुसार, श्रद्धालुओं द्वारा दानपेटियों में चढ़ाए गए आभूषण भी कथित चोरी का हिस्सा थे. आरोप है कि बाली, झुमकी, नथ, बाल स्वरूप रामलला के कंगन, पैंजनिया सहित कई कीमती आभूषण रिकॉर्ड में दर्ज होने से पहले ही निकाल लिए जाते थे.

इन आरोपों की पुष्टि के लिए बरामद सामान, रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है.

बैंक खातों की भी हो रही जांच

मामले में गिरफ्तार अविनाश पांडे की भूमिका भी जांच के दायरे में है। जांच के दौरान कथित तौर पर उसके बैंक खाते में जमा राशि का मिलान मंदिर की जमा राशि के रिकॉर्ड से किया गया। पूछताछ और बैंक दस्तावेजों के आधार पर जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि चोरी की गई कथित रकम का कितना हिस्सा विभिन्न खातों में जमा किया गया।

जांच अभी जारी, कई और खुलासों की संभावना

जांच एजेंसियां इस पूरे मामले में सीसीटीवी फुटेज, हिडन कैमरों की रिकॉर्डिंग, बैंक दस्तावेज, वाउचर, बरामद नकदी और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ के आधार पर साक्ष्य जुटा रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और आगे भी कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं.