Shiv Sena (UBT) Rebel MP : 2022 के राजनीतिक तूफान के बाद 2026 में एक बार फिर से उद्धव ठाकरे के लिए एक बड़ा राजनीतिक तूफान आया है.शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के छह सांसदों (संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटील आष्टीकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे ) के बगावती तेवरों के बीच महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें Y+ श्रेणी की सुरक्षा देने का फैसला किया है. इस संबंध में महाराष्ट्र सरकार द्वारा पुलिस महानिदेशक (DGP) को आवश्यक निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है.
Securing the MPs. This is as official as it can get. Maharastra home dept asks DGP to enhance security for 6 rebel MPs of Shiv Sena Uddhav faction. pic.twitter.com/VB0vhAHISu
— Pranesh Kumar Roy (@roypranesh) June 18, 2026
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की चर्चाएं तेज हैं. रिपोर्टों के मुताबिक इन सांसदों ने लोकसभा में अलग समूह बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं और इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की खबरें भी सामने आई हैं.
Shiv Sena (UBT) Rebel MP:कौन हैं बागी सांसद?
राजनीतिक गलियारों में जिन सांसदों के नाम चर्चा में हैं, उनमें संजय पाटिल, संजय देशमुख, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल-अष्टीकर और संजय जाधव शामिल बताए जा रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि ये सांसद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व से असंतुष्ट हैं और शिंदे गुट के संपर्क में हैं.
सुरक्षा बढ़ाने के पीछे क्या वजह?
सूत्रों के अनुसार, संभावित राजनीतिक तनाव, विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा संबंधी आशंकाओं को देखते हुए इन सांसदों को Y+ सुरक्षा देने का निर्णय लिया गया है. महाराष्ट्र में 2022 के शिवसेना विभाजन के दौरान भी बागी विधायकों और नेताओं की सुरक्षा बढ़ाई गई थी. इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने एहतियाती कदम उठाया है.
उद्धव खेमे में बढ़ी चिंता
छह सांसदों के संभावित विद्रोह की खबरों के बाद उद्धव ठाकरे ने पार्टी के सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की बैठकें बुलाकर संगठन को एकजुट रखने की कोशिश शुरू कर दी है. पार्टी नेता संजय राउत लगातार दावा कर रहे हैं कि “ऑपरेशन टाइगर” के जरिए सांसदों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया है कि सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए बड़े आर्थिक प्रस्ताव दिए जा रहे हैं.
दिल्ली में भी बढ़ी हलचल
दिल्ली में आयोजित संसदीय दल की बैठक में नौ में से केवल तीन सांसदों की मौजूदगी ने उद्धव खेमे की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पार्टी ने सांसदों को व्हिप जारी कर बैठक में उपस्थित रहने का निर्देश दिया था,लेकिन अधिकांश सांसदों की गैरमौजूदगी ने संभावित टूट की अटकलों को और मजबूत कर दिया.
महायुति को होगा फायदा?
यदि छह सांसद आधिकारिक तौर पर शिंदे गुट में शामिल हो जाते हैं तो लोकसभा में एनडीए और महायुति की ताकत और बढ़ सकती है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम महाराष्ट्र में विपक्षी महाविकास अघाड़ी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है, खासकर तब जब स्थानीय निकाय चुनाव और अन्य राजनीतिक चुनौतियां सामने हैं.
राजनीतिक संदेश भी अहम
विशेषज्ञों का मानना है कि Y+ सुरक्षा सिर्फ सुरक्षा का मामला नहीं बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है. इससे यह संकेत जाता है कि सरकार संभावित बागी सांसदों को संरक्षण देने के लिए तैयार है. दूसरी ओर, विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव और दल-बदल को बढ़ावा देने वाली रणनीति के रूप में पेश कर रहा है.
फिलहाल सभी की नजर 19 जून और उसके बाद होने वाले घटनाक्रम पर है. यदि छह सांसद औपचारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल होते हैं तो यह 2022 के बाद शिवसेना में दूसरा सबसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा, साथ ही मोदी सरकार के मिशन 360 के लिए एक बड़ी सफलता भी होगी.

