देहरादून : उत्तराखंड की बेटी लेफ्टिनेंट कमांडर प्रियंका गुसाईं ने भारतीय नौसेना की नौ सदस्यीय महिला सैन्य अधिकारी टीम के साथ 314 दिनों में 25,500 समुद्री मील (लगभग 47 हजार किलोमीटर) की विश्व समुद्री यात्रा पूरी कर नया इतिहास रच दिया है. स्वदेश में निर्मित आईएएसवी-50 त्रिवेणी (IASV-50 Triveni) पर सवार इस दल ने दुनिया के पांचों महासागरों को पार करते हुए भारत का गौरव बढ़ाया.
नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूरी टीम से मुलाकात कर उन्हें इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर सम्मानित किया और कहा कि यह भारतीय महिलाओं की क्षमता, साहस और सशक्तिकरण का शानदार उदाहरण है.
Priyanka Gusain:314 दिनों तक समुद्र में रहकर पूरा किया विश्व भ्रमण
थल सेना, नौसेना और वायुसेना की नौ महिला अधिकारियों का यह संयुक्त दल 11 सितंबर 2025 को मुंबई से विश्व भ्रमण के लिए रवाना हुआ था. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वयं इस अभियान को हरी झंडी दिखाई थी.
15 मीटर लंबी स्वदेशी नौका IASV-50 त्रिवेणी, जो पूरी तरह हवा की शक्ति से संचालित होती है, पर सवार टीम ने 314 दिनों तक समुद्र में रहकर दुनिया के पांचों महासागरों को पार किया. अभियान सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद दल 22 जुलाई को मुंबई लौटा, जहां गेटवे ऑफ इंडिया पर उनका भव्य स्वागत किया गया.
समुद्री तूफानों और कठिन परिस्थितियों का किया सामना
इस चुनौतीपूर्ण अभियान के दौरान महिला अधिकारियों ने तेज हवाओं, ऊंची लहरों, समुद्री तूफानों और प्रतिकूल मौसम जैसी अनेक कठिन परिस्थितियों का साहसपूर्वक सामना किया. कठिन हालात के बावजूद टीम ने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा कर भारतीय सशस्त्र बलों की पेशेवर क्षमता और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया.
पौड़ी गढ़वाल की रहने वाली हैं प्रियंका गुसाईं
लेफ्टिनेंट कमांडर प्रियंका गुसाईं मूल रूप से ग्राम भटकोट, तहसील थलीसैंण, जनपद पौड़ी गढ़वाल की निवासी हैं। उनके पिता हर्ष गुसाईं भारतीय सेना से सेवानिवृत्त सूबेदार हैं।
प्रियंका ने देहरादून के डीआईटी से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद भारतीय नौसेना जॉइन की। उनके पिता ने बताया कि प्रियंका बचपन से ही मेधावी थीं और कठिन चुनौतियों को स्वीकार करना उनका स्वभाव रहा है।
गेटवे ऑफ इंडिया पर हुआ भव्य स्वागत
विश्व भ्रमण से लौटने पर मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया पर रक्षा मंत्रालय, भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल राज सुब्रमणि, सैन्य अधिकारियों, जवानों, स्कूली विद्यार्थियों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने अभियान दल का जोरदार स्वागत किया।
आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि
स्वदेश में विकसित IASV-50 त्रिवेणी द्वारा इतनी लंबी और चुनौतीपूर्ण समुद्री यात्रा का सफल संचालन भारत की बढ़ती नौसैनिक तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भर भारत अभियान की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह अभियान भविष्य में भारतीय समुद्री अनुसंधान, नौकायन और नौसैनिक अभियानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा।
लेफ्टिनेंट कमांडर प्रियंका गुसाईं की यह उपलब्धि न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उनका साहस, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण देश की युवा पीढ़ी, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

