मॉनसून सत्र से पहले NDA का बड़ा मिशन! क्या बड़े बिलों को लागू करने के लिए जुटाये जा रहे हैं सांसद

NDA Mission 360  नई दिल्ली :संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले केंद्र की सत्तारूढ़ NDA सरकार दो बड़े राजनीतिक और संवैधानिक कदमों को आगे बढ़ाने की तैयारी में जुटी हुई है. सरकार की प्राथमिकता ‘परिसीमन बिल’ (Delimitation Bill) और ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ यानी महिला आरक्षण कानून को लागू करना बताई जा रही है. इसके लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत (360 सासंद) हासिल करने की कवायद तेज हो गई है.

सूत्रों के अनुसार, BJP नेतृत्व वाले NDA का लक्ष्य लोकसभा में कम से कम 360 सांसदों का समर्थन सुनिश्चित करना है, ताकि संवैधानिक संशोधन से जुड़े इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को आसानी से पारित कराया जा सके. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यदि संख्या और राजनीतिक परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो सरकार मॉनसून सत्र में इस दिशा में बड़ा कदम उठा सकती है.

NDA Mission 360:जनगणना और परिसीमन पर सरकार का फोकस

सरकार का मानना है कि आगामी जनगणना और उससे जुड़े आंकड़े परिसीमन प्रक्रिया के लिए आधार तैयार करेंगे. परिसीमन के जरिए लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाएगा, जिससे आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके.

BJP के वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि वर्तमान संसदीय प्रतिनिधित्व काफी हद तक 1971 की जनगणना के आधार पर टिका हुआ है, जबकि पिछले पांच दशकों में देश की जनसंख्या और सामाजिक संरचना में बड़े बदलाव हुए हैं. ऐसे में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को नई परिस्थितियों के अनुरूप ढालना आवश्यक है.

महिला आरक्षण कानून को लेकर भी तैयारी

नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करना भी सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल बताया जा रहा है. माना जा रहा है कि महिला आरक्षण लागू होने के बाद लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, साथ ही युवा और नई पीढ़ी के नेताओं के लिए भी राजनीति में अवसर बढ़ सकते हैं.

दक्षिणी राज्यों को साधने की कोशिश

ताजा घटनाक्रमों के देखते हुए ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि सरकार दक्षिण भारत की क्षेत्रीय पार्टियों को भी अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है. बजट सत्र के दौरान DMK नेतृत्व के साथ महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर चर्चा होने की बात सामने आई थी, हालांकि उस समय राजनीतिक परिस्थितियों के कारण समर्थन नहीं मिल सका था.

अब NDA नेतृत्व दक्षिणी राज्यों को यह समझाने का प्रयास कर रहा है कि परिसीमन का प्रस्तावित मॉडल उनके हितों के खिलाफ नहीं होगा और उन्हें भी इसका लाभ मिल सकता है.

TMC और महाराष्ट्र की राजनीति पर नजर

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) में संभावित विभाजन के बाद उभरने वाले किसी नए गुट से NDA को समर्थन मिल सकता है. इसके अलावा महाराष्ट्र की राजनीति पर भी विशेष नजर रखी जा रही है.

शिवसेना (UBT) के कुछ सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में जाने की अटकलें तेज हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी के कुछ सांसद अलग गुट बनाकर बाद में शिंदे नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं. हालांकि शिवसेना (UBT) नेतृत्व ने इन दावों को खारिज करने की कोशिश की है और सभी सांसदों के एकजुट होने का दावा किया है.

360 के आंकड़े तक पहुंचने की चुनौती

लोकसभा में किसी संवैधानिक संशोधन को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है. NDA को इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत है. राजनीतिक समीकरणों के अनुसार यदि कुछ क्षेत्रीय दलों या विपक्षी सांसदों का समर्थन मिलता है, तो NDA आवश्यक संख्या के करीब पहुंच सकता है.

हालांकि विपक्षी दल यदि पूरी ताकत के साथ सदन में मौजूद रहते हैं और पार्टी व्हिप का पालन करते हैं, तो सरकार के लिए यह रास्ता आसान नहीं होगा. ऐसे में आगामी मॉनसून सत्र देश की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, जहां परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दे राष्ट्रीय बहस के केंद्र में रहेंगे.

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