बदलेगा छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों का चेहरा: बिना बस्ते के स्कूल जाएंगे बच्चे, सीखेंगे कोडिंग और हुनर

No Bag Day In School रायपुर: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक बेहद शानदार और बड़ी खबर है! स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के व्यावहारिक विकास को बढ़ावा देने के लिए तीन बड़े और ऐतिहासिक बदलाव लागू किए हैं। इन नीतिगत फैसलों का मुख्य उद्देश्य बच्चों को सिर्फ किताबी कीड़ा न बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर, कुशल और हुनरमंद बनाना है.

No Bag Day In School : शनिवार को स्कूल में बच्चों की मौज

पहले बड़े बदलाव के तहत अब हर शनिवार को स्कूलों में ‘नो बैग डे’ यानी गतिविधि दिवस मनाया जाएगा. इस दिन बच्चे बिना बस्ते के, बिना किसी मानसिक तनाव के स्कूल आएंगे. पारंपरिक किताबी पढ़ाई के बजाय छात्र खेलकूद, योग, कला, संगीत और साहित्यिक गतिविधियों में हिस्सा लेंगे, जिससे उनका मानसिक और शारीरिक विकास होगा.

कक्षा 6वीं से 8वीं तक व्यावसायिक शिक्षा

दूसरा बड़ा बदलाव मिडिल स्कूल के छात्रों के लिए है. अब कक्षा 6वीं से 8वीं तक के छात्रों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत व्यावसायिक शिक्षा (वोकेशनल ट्रेनिंग) को अनिवार्य कर दिया गया है. इसके जरिए बच्चे आधुनिक दौर की मांग जैसे कोडिंग, स्थानीय कला, शिल्प और कृषि जैसे व्यावहारिक हुनर सीखेंगे, जो भविष्य में उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद करेंगे.

स्कूल प्रबंधन समितियों (SMC) का पुनर्गठन

तीसरे बदलाव के तहत स्कूल प्रबंधन समितियों (SMC) का नए सिरे से पुनर्गठन किया गया है. अब इन समितियों में 75 प्रतिशत हिस्सेदारी अनिवार्य रूप से छात्रों के माता-पिता यानी अभिभावकों की होगी. इस निर्णय से स्कूलों के रोजमर्रा के संचालन, बजट के पारदर्शी उपयोग और मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) की गुणवत्ता की निगरानी में पालकों की भूमिका और जवाबदेही सबसे मजबूत हो जाएगी.

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