Bankipur By-Election : बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस सीट को प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है,जबकि जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर भी इस सीट को लेकर लगातार हमलावर हैं. ऐसे में आगामी उपचुनाव बिहार की राजनीति का सबसे चर्चित मुकाबला बनता दिखाई दे रहा है.
Bankipur By-Election:नितिन नबीन के इस्तीफे का बाद खाली हुई सीट
दरअसल, बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (Nitin Nabin) के इस्तीफे के बाद खाली हुई है. राज्यसभा सांसद बनने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी थी. यह सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है. नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर भी इस सीट का कई बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, जबकि स्वयं नितिन नवीन भी यहां से कई बार विधायक चुने गए हैं.
पांच घंटे चली भाजपा अध्यक्ष की मैराथन बैठक
दो दिवसीय बिहार दौरे पर पटना पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार को बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के मंडल अध्यक्षों और प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ लंबी रणनीतिक बैठक की. पटना के सिपारा में आयोजित यह बैठक करीब पांच घंटे तक चली.
बैठक में जिलाध्यक्ष रूपनारायण मेहता समेत कई वरिष्ठ नेता और संगठन पदाधिकारी मौजूद रहे. भाजपा नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं के साथ बूथ स्तर तक की तैयारियों और आगामी चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की.
विकास कार्यों को बनाया जाएगा चुनावी मुद्दा
बैठक के दौरान भाजपा अध्यक्ष ने बांकीपुर क्षेत्र में हुए विकास कार्यों की समीक्षा की. कार्यकर्ताओं को बताया गया कि राज्य के अन्य विधानसभा क्षेत्रों की तुलना में बांकीपुर में कौन-कौन सी बड़ी परियोजनाएं पूरी हुई हैं और आने वाले समय में किन विकास योजनाओं का लाभ जनता को मिलने वाला है.
सूत्रों के अनुसार संवाद के दौरान छोटे-मोटे स्थानीय मुद्दों की बजाय बड़ी और महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर विशेष फोकस रखा गया. भाजपा का मानना है कि विकास कार्यों के दम पर वह जनता का विश्वास दोबारा हासिल करेगी.
प्रशांत किशोर पर भाजपा का सीधा हमला
इस बीच जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर लगातार दावा कर रहे हैं कि उनकी पार्टी बांकीपुर सीट पर पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और जनता बीजेपी को उसकी “असलियत” दिखा देगी.
प्रशांत किशोर के इन बयानों का जवाब देते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं ने बैठक में खुली चुनौती दे डाली. कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यदि प्रशांत किशोर में हिम्मत है तो वे खुद बांकीपुर से चुनाव लड़कर दिखाएं.
बैठक में मौजूद कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि प्रशांत किशोर चुनाव मैदान में उतरते हैं तो भाजपा उन्हें राजनीतिक रूप से करारा जवाब देगी और उनकी चुनावी महत्वाकांक्षाओं पर विराम लग जाएगा.
प्रतिष्ठा की लड़ाई क्यों बन गया है बांकीपुर?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बांकीपुर सीट भाजपा के लिए सिर्फ एक विधानसभा सीट नहीं बल्कि उसकी राजनीतिक साख से जुड़ा मुद्दा बन चुकी है. यह सीट वर्षों से पार्टी का मजबूत गढ़ रही है और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की परंपरागत सीट मानी जाती है.
यही वजह है कि भाजपा नेतृत्व खुद मैदान में उतरकर संगठन को सक्रिय कर रहा है. पार्टी किसी भी कीमत पर इस सीट को अपने कब्जे में बनाए रखना चाहती है.
आज भी जारी रह सकता है संवाद कार्यक्रम
भाजपा नेताओं के मुताबिक गुरुवार को भी पार्टी अध्यक्ष क्षेत्र के तीन अन्य मंडल अध्यक्षों और प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर सकते हैं. इन बैठकों के जरिए बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और उपचुनाव की तैयारी को अंतिम रूप देने का प्रयास किया जा रहा है.
बहरहाल, बांकीपुर उपचुनाव अब सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं रह गया है. यह मुकाबला बीजेपी और प्रशांत किशोर की जन सुराज के बीच राजनीतिक ताकत की परीक्षा बनता जा रहा है. ऐसे में आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति का सबसे दिलचस्प मुकाबला इसी सीट पर देखने को मिल सकता है.

