Share market: ईरान के ताजा हमलों के बाद US-ईरान बातचीत से जुड़ी अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और लगातार विदेशी फंड के निकलने के बीच बुधवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 1,000 पॉइंट्स और गिर गया.
Share market: सेंसेक्स, BSE और NSE सेंसेक्स लुढ़का
बुधवार सुबह करीब 11:15 बजे, सेंसेक्स 73,697 पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले बंद 74,649.84 से करीब 1,000 पॉइंट्स नीचे था.
50 शेयरों वाला NSE निफ्टी भी बुधवार को शुरुआती कारोबार में 177.40 पॉइंट्स गिरकर 23,302.50 पर आ गया.
30 शेयरों वाला BSE सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 699.74 पॉइंट्स गिरकर 73,959.48 पर आ गया. सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़, टेक महिंद्रा, इंफोसिस, HCL टेक, ITC और इटरनल ओपनिंग पर सबसे ज़्यादा पिछड़ने वालों में से थे.
PTI न्यूज़ एजेंसी ने जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के हवाले से कहा, “वेस्ट एशिया संघर्ष में हल्की बढ़ोतरी ने ब्रेंट क्रूड की कीमत को फिर से USD 97 के करीब पहुंचा दिया है, जो दिखाता है कि भारत को एनर्जी शॉक से कोई राहत नहीं मिलने वाली है.”
स्टॉक मार्केट में गिरावट के पीछे क्या है?
स्टॉक मार्केट में गिरावट तब आई जब ईरान ने कुवैत और बहरीन की तरफ मिसाइलें दागीं — इससे US-इज़राइल के साथ उसकी लड़ाई फिर से शुरू होने का डर पैदा हो गया है. यह लड़ाई अभी एक नाजुक सीज़फ़ायर के तहत रुकी हुई है, जबकि पक्के तौर पर युद्धविराम के लिए बातचीत अभी भी अटकी हुई है. US ने कहा कि मिसाइलें अपने टारगेट पर नहीं लगीं. कुवैत पर दागी गई दो मिसाइलें रास्ते में ही टूट गईं, जबकि US और बहरीन की सेनाओं ने बहरीन पर निशाना साधी गई मिसाइलों को रोक लिया.
US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव के नए टैरिफ लगाने के प्रस्ताव से भी हड़कंप
इस बीच, US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ने भारत समेत 54 देशों पर 12.5 परसेंट एक्स्ट्रा ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव दिया है, क्योंकि ये देश जबरन मज़दूरी से बने सामान के इम्पोर्ट पर रोक लगाने में नाकाम रहे हैं.
यह कार्रवाई 60 देशों के खिलाफ शुरू की गई जांच के बाद हुई है, जिन्हें USTR ने जबरन मज़दूरी से बने इम्पोर्ट पर बैन लगाने और उसे असरदार तरीके से लागू करने में नाकाम बताया है.
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