रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप आयोजित “सुशासन तिहार 2026” के अंतर्गत प्रदेशभर में लगाए जा रहे जनसमस्या समाधान शिविर आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण के साथ सामाजिक जागरूकता के प्रभावी मंच बनकर उभर रहे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग तथा जिला बाल संरक्षण इकाइयों द्वारा इन शिविरों में “बाल विवाह मुक्त भारत अभियान” के तहत व्यापक जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित कर लोगों को बाल विवाह रोकथाम का संकल्प दिलाया जा रहा है।
जिला बालोद के विकासखंड गुंडरदेही अंतर्गत ग्राम पंचायत चौरेल में आयोजित शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं एवं मांगों का निराकरण करते हुए शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में गोद भराई एवं अन्नप्राशन संस्कार जैसे सामाजिक सरोकार से जुड़े आयोजन भी संपन्न कराए गए। साथ ही उपस्थित नागरिकों को बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के विरुद्ध जागरूक करते हुए शपथ दिलाई गई।
इसी प्रकार विकासखंड डौंडी लोहारा के ग्राम पंचायत खरथुली में आयोजित शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं का निराकरण किया गया तथा किशोरी बालिकाओं को स्वच्छता किट वितरित कर स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। शिविर में “बाल विवाह मुक्त भारत अभियान” के तहत उपस्थित जनसमुदाय को बाल विवाह रोकथाम का संकल्प दिलाते हुए समाज में जागरूकता फैलाने का संदेश दिया गया।
विकासखंड गुरूर के ग्राम पंचायत फागुनदाह में आयोजित शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति में जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई तथा ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान किया गया। कार्यक्रम के दौरान गोद भराई एवं छोटे बच्चों के अन्नप्राशन संस्कार आयोजित किए गए। साथ ही बाल विवाह के दुष्परिणामों एवं कानूनी प्रावधानों की जानकारी देते हुए उपस्थित लोगों को बाल विवाह मुक्त भारत की शपथ दिलाई गई।
वहीं जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के पेंड्रा ब्लॉक अंतर्गत नगर निकाय क्षेत्रों में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविरों में भी जिला बाल संरक्षण इकाई एवं महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ के संबंध में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया। शिविरों में बड़ी संख्या में उपस्थित नागरिकों ने बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करने का संकल्प लिया।
प्रदेशभर में आयोजित इन शिविरों में महिलाओं, किशोरियों एवं ग्रामीणजनों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली। शासन द्वारा जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के साथ-साथ सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन एवं जागरूक समाज निर्माण की दिशा में भी सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं।

