30 मिनट में डूबे 5.50 लाख करोड़! शेयर बाजार में आखिरी वक्त क्यों मचा हाहाकार?

Stock Market Big Fall :  भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को अचानक आई भारी गिरावट ने निवेशकों को बड़ा झटका दे दिया. दिनभर सामान्य कारोबार के बाद बाजार बंद होने से ठीक पहले बिकवाली इतनी तेज हुई कि सिर्फ 30 मिनट में लाखों करोड़ रुपये का नुकसान हो गया.

सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बड़े स्तर पर टूटे और बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. सबसे ज्यादा दबाव बड़े शेयरों में देखने को मिला.

Stock Market Big Fall: सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट

कारोबार खत्म होने पर बीएसई सेंसेक्स 1092 अंक यानी 1.45 फीसदी टूटकर 74,775 पर बंद हुआ. वहीं निफ्टी 359 अंक यानी 1.50 फीसदी गिरकर 23,547 के स्तर पर आ गया.

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने के लिए मिली. मिडकैप इंडेक्स करीब 1 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स 1.30 फीसदी तक टूट गया.

5.56 लाख करोड़ रुपये का नुकसान

बाजार में आई इस भारी गिरावट का असर सीधे निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा. बीएसई का मार्केट कैपिटलाइजेशन 470 लाख करोड़ रुपये से घटकर 465 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया.

यानि निवेशकों की कुल वैल्यूएशन में करीब 5.56 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई. सिर्फ आधे घंटे की बिकवाली ने बाजार का पूरा माहौल बदल दिया.

वजह नंबर 1: मानसून को लेकर बढ़ी चिंता

शेयर बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह मानसून को लेकर बढ़ी चिंता मानी जा रही है. भारतीय मौसम विभाग ने बारिश के अनुमान को पहले के मुकाबले कम कर दिया.

देश में भीषण गर्मी और कृषि क्षेत्र की बारिश पर निर्भरता के बीच यह खबर बाजार को पसंद नहीं आई. कमजोर मानसून का असर खेती, ग्रामीण मांग और कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है.

विशेषज्ञों का 000मानना है कि अगर बारिश सामान्य से कम रहती है तो इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ पर भी दिखाई दे सकता है.

वजह नंबर 2: MSCI इंडिया इंडेक्स में बदलाव

दूसरा बड़ा झटका MSCI इंडिया इंडेक्स में बदलाव से लग. दोपहर करीब 3 बजे यह खबर सामने आई कि 29 मई से MSCI इंडिया इंडेक्स में नए बदलाव लागू किए जा रहे हैं.

MSCI दुनिया के सबसे बड़े ग्लोबल इंडेक्स में शामिल है और इसे ट्रैक करने वाले विदेशी फंड उसी हिसाब से अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करते हैं.

जब इंडेक्स में कुछ शेयर जोड़े या हटाए जाते हैं, तब फंड मैनेजरों को बड़े पैमाने पर खरीदारी और बिकवाली करनी पड़ती है. इसे बाजार में ‘बास्केट सेलिंग’ और ‘बास्केट बाइंग’ कहा जाता है.

रिलायंस, इंडिगो और पावरग्रिड में भारी बिकवाली

बाजार में आखिरी समय में आई बिकवाली का सबसे ज्यादा असर रिलायंस, इंडिगो और पावरग्रिड जैसे बड़े शेयरों पर देखने को मिला.

विदेशी निवेशकों और बड़े फंड हाउस की तेज बिकवाली ने बाजार को नीचे खींच दिया. इससे निवेशकों में घबराहट बढ़ गई और रिटेल निवेशकों ने भी तेजी से शेयर बेचना शुरू कर दिया.

क्या आगे भी जारी रहेगा दबाव?

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की नजर मानसून, ग्लोबल संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी.

अगर मानसून कमजोर रहता है और विदेशी फंडों की बिकवाली जारी रहती है तो बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है. हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने के बजाय सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है.

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