Twisha Death Case : ट्विशा शर्मा डेथ केस में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रिटायर्ड जज और ट्विशा शर्मा की सास गिरिबाला सिंह को घंटों की पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया. यह कार्रवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत रद्द किए जाने के कुछ ही घंटों बाद हुई.
CBI की टीम गुरुवार सुबह भोपाल के बाग मुगलिया एक्सटेंशन स्थित एचआईजी-311 आवास पर पहुंची. इस दौरान इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा. जांच एजेंसी ने घर के भीतर कई घंटों तक पूछताछ की और बाद में गिरिबाला सिंह को हिरासत में ले लिया.
Twisha Death Case:घर पहुंची CBI टीम,वर्चुअल वॉकथ्रू की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, CBI टीम घटनास्थल की परिस्थितियों को समझने और घटना की कड़ियों को जोड़ने के लिए वर्चुअल वॉकथ्रू तैयार कर रही है. इसके लिए जांच एजेंसी ने घर का निरीक्षण किया और तकनीकी टीम भी मौके पर मौजूद रही. जांच एजेंसी का मानना है कि केस में कई ऐसे तथ्य हैं, जिन्हें घटनास्थल के पुनर्निर्माण के जरिए स्पष्ट किया जा सकता है.
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
गिरिबाला सिंह पर दहेज उत्पीड़न और दहेज मृत्यु से जुड़ी गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. जानकारी के अनुसार उनके खिलाफ दहेज मृत्यु से संबंधित धारा 80 सेक्शन 2, विवाहित महिला के साथ क्रूरता से संबंधित धारा 85 और संयुक्त आपराधिक दायित्व की धारा 3 सेक्शन 5 के तहत केस दर्ज किया गया है. इन धाराओं के तहत दोष साबित होने पर कड़ी सजा का प्रावधान है.
बेटे समर्थ सिंह पहले से CBI हिरासत में
इस मामले में गिरिबाला सिंह के बेटे और पेशे से वकील समर्थ सिंह पहले से ही CBI की हिरासत में हैं. उन पर भी ट्विशा शर्मा को कथित तौर पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने के आरोप हैं. CBI ने हाल ही में मध्य प्रदेश पुलिस से इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी. इसके बाद से जांच तेजी से आगे बढ़ रही है.
हाईकोर्ट ने क्यों रद्द की अग्रिम जमानत?
गिरिबाला सिंह को 15 मई को भोपाल की निचली अदालत से अग्रिम जमानत मिली थी, लेकिन महाधिवक्ता ने हाईकोर्ट में इसे चुनौती दी.
महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अदालत में दलील दी कि गिरिबाला सिंह ने जमानत की शर्तों का पालन नहीं किया और जांच में सहयोग भी नहीं किया. अदालत ने इन तर्कों को गंभीरता से लेते हुए देर रात उनका अग्रिम जमानत आदेश रद्द कर दिया.
ट्विशा के शरीर पर 7 चोटों का जिक्र
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश में ट्विशा शर्मा के शरीर पर सात चोटों का जिक्र भी किया गया है. महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के अनुसार अदालत ने माना कि ये सभी चोटें एंटी मार्टम यानी मौत से पहले की थीं.
उन्होंने कहा कि कोर्ट ने यह भी माना कि शव को उतारते समय इस प्रकार की चोटें आना संभव नहीं है. इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि “ऐसा प्रतीत होता है कि किसी प्रकार का अपराध घटित हुआ है.”
मामले ने पकड़ा राजनीतिक और सामाजिक तूल
एक रिटायर्ड जज और उनके परिवार का नाम सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है. सोशल मीडिया पर भी लोग इस केस में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
अब सबकी नजर CBI की आगे की जांच और कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है.

