क्या है क्रेडिट सुइस का मामला, दुनिया का यह दिग्गज बैंक कैसे डूबने के कगार पर पहुंच गया?भारत पर कितना होगा असर?

बैंकों के लिए मार्च का महीना अच्छा नहीं है. 10 मार्च को अमेरिकी बैंक सिलिकॉन वैली बैंक के डूबने की ख़बर आई. बताया जा रहा है कि अमेरिका में कई छोटे और मध्यम आकार के बैंक संकट में हैं. लिहाज़ा कई और बैंकों के डूबने की ख़बर आ सकती है. पिछले एक-सवा साल में इंटरेस्ट रेट में वृद्धि ने इन बैंकों के लिए बड़ा संकट पैदा कर दिया है. पिछले हफ्ते के अंत में क्रेडिट सुइस के गंभीर संकट में फंसने की खबर आई. यह दूसरा सबसे बड़ा स्विस बैंक है. फिलहाल इसे डूबने से बचा लिया गया है. स्विस सरकार और रेगुलेटर ने हस्तक्षेप कर इसे बचाया. सबसे बड़ा स्विस बैंक UBS इसका अधिग्रहण करेगा. माना जा रहा है कि 2023 के अंत तक अधिग्रहण की यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी.

क्रेडिट सुइस बैंक क्यों डूबने के कगार पर पहुंच गया?

यह बैंक पिछले एक-डेढ़ साल से मुश्किल में था. एक के बाद एक स्कैंडल की ख़बरों के आने से इनवेस्टर्स का भरोसा इस बैंक पर घटने लगा. इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 12 महीने में इस शेयर का प्राइस 75 फीसदी गिर चुका है. पिछले छह महीने में इसकी वैल्यूएशन 50 फीसदी से ज़्यादा घट गई है. चौथी तिमाही यानी दिसंबर में इस बैंक को 7.9 अरब डॉलर का नुकसान हुआ. टॉप मैनेजमेंट में बार-बार बदलाव का भी बुरा असर बैंक पर पड़ा. एक्जिक्यूटिव्स को बड़े फैसले लेने से पहले ही इस्तीफा देने को मजबूर किया गया. इससे बड़े डिपॉजिटर्स ने अपने काफी पैसे इस बैंक से निकाल लिए. इससे इसकी समस्या बढ़ गई. स्विस बैंक ने पिछले हफ्ते बड़ी आर्थिक मदद भी दी लेकिन इससे बात नहीं बनी. आखिरकार UBS के इसे खरीदने के लिए तैयार होने पर यह डूबने से बच पाया.

सिलिकॉन वैली बैंक और क्रेडिट सुइस के डूबने की वजह एक नहीं

क्रेडिट सुइस के गंभीर क्राइसिस में फंसने की ख़बर सिलिकॉन वैली बैंक के डूबने के कुछ दिन बाद आई. इससे यह धारणा बनी कि अमेरिकी बैंकिंग क्राइसिस देश की सीमा पार कर यूरोप पहुंच गया है लेकिन दोनों बैंकों के डूबने के करीब पहुंचने की वजहें एक नहीं हैं. जहां सिलिकॉन वैली बैंक अमेरिका में बढ़ते इंटरेस्ट रेट का शिकार हो गया वहीं क्रेडिट सुइस अपनी आंतरिक वजहों से डूबने के करीब पहुंच गया. चूंकि यह बड़ा बैंक था इसीलिए इसके प्रतिद्वंद्वी बैंक ने ही इसे खरीदने की पेशकश कर दी. दूसरा यह कि स्विस सरकार और स्विस रेगुलेटर बहुत जल्द हरकत में आ गए जिससे इसे डूबने से बचा लिया गया.

इंडिया में बैंकों को कितना खतरा है?

एक के बाद एक दो बड़े बैंकों के डूब जाने से इंडिया में भी लोग चिंतित हैं. सवाल है कि क्या इंडिया में भी बैंकों को लेकर किसी तरह का खतरा है? फिलहाल तो इसका जवाब ना है लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि अगर अमेरिका और यूरोपीय बैंकिंग सेक्टर की मुश्किल बढ़ती है तो इसका असर इंडियन बैंकिंग सेक्टर पर नहीं पड़ेगा. अभी इंडियन बैंकिंग सेक्टर की सेहत अच्छी है. RBI के गवर्नर्स की सख्त निगरानी की वजह से इंडिया में बैंक अमेरिका और यूरोप जैसी खराब स्थिति में नहीं हैं. खासकर पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन की कोशिशों की वजह से इंडियन बैंकिंग सिस्टम संकट से काफी हद तक बाहर आ चुका है. उन्होंने बैंकों को अपने डूबे कर्ज की पहचान करने और सुधार करने के उपायों पर जोर दिया. बाद के गवर्नर्स ने भी यह रुख बनाए रखा.

हालांकि  हाल के सालों में इंडिया में बैंकों के बुक्स में रिटेल लोन की हिस्सेदारी बढ़ी है. यह थोड़ी चिंता की वजह है. अगर इनफ्लेशन या रिसेशन का खतरा बढ़ता है तो रिटेल लोन पर डिफॉल्ट बढ़ सकता है. इसका असर बैंकों की बैलेंसशीट पर पड़ेगा. उधर, बैंकिंग सेंटिमेंट को लेकर खराब हो रहे सेंटिमेंट के बीच डिपॉजिटर्स छोटे बैंकों से पैसा निकालकर बड़े बैंकों में रखना शुरू कर सकते हैं. इससे छोटे बैंक संकट में आ सकते हैं, जिसका असर पूरे बैंकिंग सेक्टर पर पड़ सकता है.

RANI VERMA
रानीवर्मा

स्वतंत्र पत्रकार

 

 

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