ट्रंप की शर्त पर भड़का पाकिस्तान, अब्राहम समझौते में शामिल होने से ख्वाजा आसिफ का साफ इनकार

Pakistan Rejects Abraham Accords : अमेरिकr राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फरमान ने पाकिस्तान के हुक्मरानों की नींद उड़ा दी है. एक तरफ जहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर अमेरिका की चापलूसी करने और कूटनीतिक संबंध सुधारने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप ने उनके सामने एक ऐसी शर्त रख दी है जिसने इस्लामाबाद में खलबली मचा दी है.

डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान सहित 5 मुस्लिम देशों से ‘अब्राहम समझौते’ (Abraham Accords) पर हस्ताक्षर करने की मांग की है. ट्रंप की इस मांग पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ बुरी तरह भड़क गए हैं और उन्होंने अमेरिका को दो टूक जवाब देते हुए इस समझौते का हिस्सा बनने से साफ इनकार कर दिया है.

Pakistan rejects Abraham Accords : क्या है अब्राहम समझौता?

दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ बातचीत में शामिल मुस्लिम देशों को अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने चाहिए. आपको बता दें कि यह समझौता इजरायल और अरब देशों के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध स्थापित करने को लेकर है.

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन पहले से ही इस समझौते के सक्रिय सदस्य हैं. अब ट्रंप प्रशासन की उम्मीद है कि सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किए, मिस्र और जॉर्डन भी इस पर हस्ताक्षर करें. ट्रंप का दावा है कि इस समझौते से जुड़े देशों को काफी फायदा हुआ है और भविष्य में इसके लाभ और भी ज्यादा होंगे.

‘हमारी मूल विचारधारा के खिलाफ है यह समझौता’

डोनाल्ड ट्रंप के इस दबाव के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने देश का रुख साफ कर दिया है. एक पाकिस्तानी न्यूज चैनल ‘समा टीवी’ को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “व्यक्तिगत रूप से मुझे नहीं लगता कि हमें किसी ऐसे समझौते में शामिल होना चाहिए जो हमारी मूल विचारधारा के खिलाफ हो.”

ख्वाजा आसिफ ने स्पष्ट किया कि वह इस्लामाबाद के अब्राहम समझौते में शामिल होने और इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने के कतई पक्ष में नहीं हैं.

फिलस्तीन मुद्दे पर पाकिस्तान का पुराना स्टैंड

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने साफ किया कि उनका देश लंबे समय से अपने एक ही रुख पर कायम है. पाकिस्तान का मानना है कि जब तक 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर एक स्वतंत्र फिलस्तीनी राष्ट्र की स्थापना नहीं हो जाती, तब तक वह इजरायल को मान्यता नहीं देगा. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है कि यह (समझौता) हमें किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं है.”

‘जिन पर रत्ती भर भरोसा नहीं, उनके साथ कैसे बैठें?’

ख्वाजा आसिफ ने सिर्फ समझौते का विरोध ही नहीं किया, बल्कि अमेरिका और इजरायल की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने तीखे लहजे में पूछा, “आप उन लोगों के साथ कैसे बैठेंगे जिनके शब्दों पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं किया जा सकता?”

अपनी बात को मजबूत करने के लिए उन्होंने पाकिस्तानी पासपोर्ट का भी जिक्र किया, जिस पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि यह ‘इजरायल की यात्रा के लिए वैध नहीं है’.

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इजरायल को बता चुके हैं ‘मानवता के लिए अभिशाप’

यह कोई पहली बार नहीं है जब ख्वाजा आसिफ ने इजरायल को लेकर ऐसा सख्त रुख अपनाया हो. वह पाकिस्तान के उन गिने-चुने नेताओं में शामिल हैं जो इजरायल के साथ किसी भी तरह के कूटनीतिक संबंध का पुरजोर विरोध करते हैं. पिछले महीने ही उन्होंने इजरायल को ‘मानवता के लिए अभिशाप’ बताया था और उस पर गाजा व अन्य क्षेत्रों में नरसंहार करने का खुला आरोप लगाया था.

अब देखना यह होगा कि शहबाज शरीफ सरकार ट्रंप की इस शर्त को ठुकराने के बाद अमेरिका के गुस्से का सामना कैसे करती है.

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