नई दिल्ली। दिल्ली वासियों को बड़ी राहत देते हुए दिल्ली जल बोर्ड की हालिया बैठक में भवन निर्माण के दौरान वसूले जाने वाले बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) शुल्क को कम करने और उसमें बड़ी रियायत देने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक संवाददाता सम्मेलन (प्रेस कॉन्फ्रेंस) को संबोधित करते हुए कहा कि नई सरकार के गठन के बाद से ही जनता को बेहतर पेयजल और सीवेज की अत्याधुनिक सुविधाएं मुहैया कराना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुरानी व्यवस्था की विसंगतियों के कारण लोगों को घर बनाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था, जिसे अब पूरी तरह सुधार दिया गया है।
प्लॉट के आकार का झंझट खत्म; अब उपभोग के आधार पर लगेगा शुल्क
जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने इस नए नियम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि पहले की व्यवस्था में 200 वर्ग मीटर से बड़े भूखंडों पर मकान बनाने के लिए वसूला जाने वाला बुनियादी ढांचा शुल्क बेहद अव्यावहारिक और अत्यधिक था, जिसके कारण लोग इसे चुकाने से कतराते थे। आम आदमी पार्टी के कार्यकाल में इस टैक्स को पानी की खपत के बजाय जमीन के आकार (साइज) से जोड़ दिया गया था, जिससे यह राशि बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। अब जल बोर्ड ने इस नीति को पूरी तरह तर्कसंगत बना दिया है। नए नियमों के तहत यह शुल्क केवल नए निर्माण कार्यों पर ही लागू होगा और यह जमीन के आकार के बजाय पानी के वास्तविक उपयोग के आकलन पर आधारित होगा।
कॉलोनियों की श्रेणियों के अनुसार 50% तक की बड़ी छूट; पुनर्निर्माण पर अतिरिक्त टैक्स नहीं
सरकार ने दिल्ली की मध्यम और निम्न आय वर्ग की कॉलोनियों को आर्थिक संबल देने के लिए विशेष छूट का प्रावधान किया है। इसके अंतर्गत:
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ई और एफ (E & F) श्रेणी की कॉलोनियां: नए निर्माण पर लगने वाले बुनियादी शुल्क में सीधे 50 प्रतिशत की कटौती की जाएगी।
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जी और एच (G & H) श्रेणी की कॉलोनियां: इन इलाकों के निवासियों को भी बुनियादी ढांचा शुल्क में पूरे 50 फीसदी की राहत दी जाएगी।
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पुनर्निर्माण (Reconstruction) पर राहत: यदि कोई पुराना मकान तोड़कर नया बनाया जाता है और उसमें पानी की खपत या कनेक्शन की आवश्यकता नहीं बढ़ती है, तो गृहस्वामी से कोई भी अतिरिक्त बुनियादी टैक्स नहीं वसूला जाएगा। इसके साथ ही, प्लॉट के खाली हिस्से (ओपन स्पेस) को कवर्ड कंस्ट्रक्शन एरिया में शामिल नहीं किया जाएगा।
इंस्पेक्टर राज का खात्मा; अब खुद के दस्तावेजों के आधार पर तय होगा टैक्स
भ्रष्टाचार और आम जनता की परेशानी को कम करने के लिए सरकार ने इस प्रक्रिया से 'इंस्पेक्टर राज' को पूरी तरह समाप्त करने का ऐलान किया है। जल मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब जल बोर्ड का कोई भी कनिष्ठ अभियंता (जेई) या इंजीनियर मकान मालिक के घर जाकर निर्माण क्षेत्र की पैमाइश (नाप-जोख) नहीं करेगा। संपत्ति का मालिक अपने आधिकारिक दस्तावेजों और नक्शे में निर्माण क्षेत्र की जो जानकारी खुद स्व-घोषणा (सेल्फ-डिक्लेरेशन) के माध्यम से देगा, उसी कागजी विवरण को अंतिम मानकर शुल्क का निर्धारण कर दिया जाएगा।
चुनावी संकल्प पत्र का वादा पूरा; दिल्ली को पारदर्शी व्यवस्था देने का दावा
मुख्यमंत्री और जल मंत्री ने संयुक्त रूप से कहा कि विधानसभा चुनाव के समय जारी किए गए संकल्प पत्र (घोषणा पत्र) में जनता से इस भारी-भरकम शुल्क को कम करने का जो वादा किया गया था, सरकार ने उसे समय रहते पूरी निष्ठा के साथ निभा दिया है। सरकार का दावा है कि इस सरलीकरण से जहां एक ओर दिल्ली जल बोर्ड के राजस्व (कमाई) में पारदर्शिता आएगी, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों को पानी और सीवर के नए कनेक्शन लेने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने और बिचौलियों के चंगुल में फंसने से मुक्ति मिलेगी।

