खंडवा कलेक्टर की अनोखी पहल, गांव में रुककर जानी लोगों की परेशानियां

खंडवा: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत परखने और ग्रामीणों से सीधा संपर्क साधने के लिए कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने एक बेहतरीन कदम उठाया है। मंगलवार (19 मई) की रात कलेक्टर गुप्ता खालवा विकासखंड के सुदूर वनांचल ग्राम डाभिया पहुंचे और वहां ग्रामीणों के बीच ही रात्रि विश्राम किया। इस दौरान उन्होंने गांव में चौपाल सजाकर लोगों की शिकायतें सुनीं और मौके पर ही उनके समाधान के आदेश दिए।

देर रात पहुंचे गांव, स्कूल और आंगनबाड़ी का लिया जायजा

कलेक्टर रात के करीब 8 बजे डाभिया गांव पहुंचे थे। उन्होंने सबसे पहले स्थानीय स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र और पंचायत भवन की व्यवस्थाओं का औचक निरीक्षण किया। इसके बाद वे गांव के चौक पर पहुंचे और चौपाल लगाकर ग्रामीणों के साथ खुलकर संवाद किया। चर्चा के दौरान ग्रामीणों ने पेयजल की किल्लत, सिंचाई के साधनों की कमी, सड़कों की खस्ताहाली, राशन दुकान की अव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा पेंशन न मिलने जैसी बुनियादी समस्याएं उनके सामने रखीं। कलेक्टर ने वहां मौजूद प्रशासनिक अमले को कई मामलों का ऑन द स्पॉट निपटारा करने को कहा, जबकि कुछ बड़े मामलों के लिए समय-सीमा तय कर रिपोर्ट तलब की।

जल संकट से उबरने के लिए दिया 'पानी रोकने' का मंत्र

ग्रामीणों से बातचीत में कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने पानी की समस्या पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने ग्रामीणों को समझाते हुए कहा:

"गर्मी के मौसम में हर साल पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ता है। इसका एकमात्र और परमानेंट इलाज वॉटर हार्वेस्टिंग (वर्षा जल संचयन) ही है। हमें हर घर और हर खेत का पानी वहीं रोकना होगा।"

उन्होंने लोगों को जागरूक किया कि वे बारिश के पानी को बर्बाद न होने दें। सोख्ता गड्ढे, खेत-तालाब और मेड़बंदी जैसे आसान तरीके अपनाकर बारिश की बूंदों को जमीन के भीतर पहुंचाएं। इससे क्षेत्र का वाटर लेवल सुधरेगा और भविष्य में खेती व पीने के पानी की कमी दूर होगी। कलेक्टर ने 'कैच द रेन' मुहिम का जिक्र करते हुए ग्राम पंचायत को मनरेगा के जरिए गांव में ज्यादा से ज्यादा जल संरचनाएं और तालाब विकसित करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर को अपने बीच पाकर खिले ग्रामीणों के चेहरे

इस दौरे के दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों के साथ बैठकर बेहद सादगी से भोजन भी किया। अगली सुबह उन्होंने गांव में साफ-सफाई, शौचालयों के उपयोग की स्थिति और स्कूल में बच्चों की हाजिरी का जायजा लिया। जिले के सबसे बड़े अधिकारी को रात में अपने बीच रुकता देख ग्रामीण बेहद खुश नजर आए। गांव के निवासी सुखराम ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इतिहास में पहली बार कोई कलेक्टर हमारे गांव में रात गुजारने आया है। उन्होंने हमारी तकलीफों को बहुत ध्यान से सुना, जिससे अब हमें उम्मीद बंधी है कि हमारे गांव की दशा बदलेगी।

अब हर महीने गांवों में होगा अफसरों का 'नाइट हॉल्ट'

कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने इस पहल का उद्देश्य बताते हुए कहा कि शासन की साफ मंशा है कि प्रशासनिक अधिकारी दफ्तरों से निकलकर सीधे जनता के बीच जाएं। इसी कड़ी में अब जिला प्रशासन के अधिकारी हर महीने किसी न किसी सुदूर गांव में रात्रि विश्राम करेंगे। इससे सरकारी योजनाओं का एकदम सही और सटीक फीडबैक सीधे जनता से मिलेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों का विकास और तेजी से किया जा सकेगा।

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