Wednesday, February 11, 2026

भोपाल में आज से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय रामायण अधिवेशन शुरु , दुनिया भर के 70 से ज्यादा रिसचर्स प्रस्तुत करेंगे पेपर

भाोपाल

शुक्रवार से भोपाल के मानस भवन में तीन दिन का अंतराष्ट्रीय रामायण और राम चरितमानस अधिवेशन शुरु हुआ. इस अधिवेशन का आयोजन एक अमेरिकी संस्था रामचरितमानस भवन ह्यूस्टन और तुलसी मानस प्रतिष्ठान भोपाल के संयुक्त प्रयास से हो रहा है.

bhopal ramayan ramcharitmanas
bhopal ramayan ramcharitmanas

भगवान राम के जीवन से जुड़ी कथा कहानी जो रामायण में है उनको लेकर समय समय पर सवाल जवाब,वाद-विवाद और शोधकार्य होते आये हैं. रामचरितमानस में वर्णित रामसेतू हो या फिर रामायण में लक्ष्मण रेखा खींचने या नहीं खींचने पर भी चर्चाएँ आदि काल से चलती आ रही हैं. विभिन्न रूपों, विभिन्न भाषाओं में अलग-अलग तरीक़े से वर्णित रामकथा की किताब रामायण पर हो रहे शोध, और उनको करने वाले शोधकर्ताओं का संगम  झीलों की नगरी भोपाल तीन दिन तक देखने को मिलेगा. आपको बता दें राजधानी भोपाल में भी एक रामायण केंद्र मौजूद है, जिसके द्वारा समय समय पर रामायण पर चिंतन मंथन और शोध कार्य निरंतर चलता रहता है.

भोपाल के मानस भवन में  हो रहा ये कार्यक्रम 17,18 और 19 मार्च तक होगा. इसका आयोजन अंतर्राष्ट्रीय रामायण अधिवेशन कर रहा है. इसके आयोजन में एक अमेरिकी संस्था भी शामिल है इसके अलावा  रामायण केंद्र और तुलसी मानस भवन समिति भी आयोजन का हिस्सा है. इस अधिवेशन के लिए दुनिया भर से 80 शोधकर्ताओं ने अपना रजिस्ट्रेशन करवाया है. जिसमें से लगभग 70 शोधकर्ता अपने रिसर्च पेपर को लेकर आ रहे हैं और इस अंतरराष्ट्रीय रामायण अधिवेशन में उसे प्रस्तुत करेंगे. रामायण और रामचरितमानस को लेकर सकारात्मक संदर्भों पर इस अधिवेशन में चर्चा होगी. तुलसी मानस भवन संस्था के अध्यक्ष रघुनंदन शर्मा का कहना है कि  हम सकारात्मक बात करते हैं,आलोचक या फिर नकारात्मकता फैलाने वालों पर हम ध्यान नहीं देते.

भोपाल के रामायण केंद्र से दुनिया भर के लगभग 700 शोधकर्ता जुड़े हुए हैं, जो लगातार रामायण पर शोधकार्य करते रहे हैं. रामायण केंद्र ने ऐसे करीब 7000 कथावाचकों का डेटाबेस तैयार किया है, जिनका जीवन यापन सिर्फ रामकथा पर चलता है. रामायण केंद्र के निदेशक डॉ राजेश श्रीवास्तव के मुताबिक उनके पास 300 से ज्यादा रामायण  का संकलन उपलब्ध है, जिन पर अलग-अलग लोगों ने शोध किया है. डॉ राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि बहुत सारे ऐसे प्रसंग जो हमें कथावाचकों और रामलीला में देखने को मिलते हैं लेकिन वह है कहां उपलब्ध हैं, इसकी जानकारी किसी को नहीं है. रामायण केंद्र अब तक करीब 100 से ज्यादा ऑनलाइन और ऑफलाइन सेमिनार कर चुका है. जिसके जरिए सही जानकारी लोगों तक पहुंच रही है.

Latest news

Related news